मां बेटे की सेक्स कहानियों

हेलो दोस्तों, आज जो मां बेटे की चुदाई कहानी बताने जा रहा हू वो मेरी चाची  की चुदाई की हैं, जो चाची ने अपने लड़के से चूत मरवाई . मेरी उम्र 18 साल   की  है  और  मैं  अपनी  माँ    के   साथ   अकेला      रहता  हूँ   पापा  फौज  में  है  जिस  वजह  से  वो  साल   में  2 या   3 बार  ही    ghar   आते  है  और  जब  भी  आतें  है  तो  मम्मी  की  जमकर  चुदाई  करते  है  मेरी  मम्मी  की  ऐज   भी  अभी  ज्यादा  नहीं  थी  वो  कम  ऐज   में  शादी   हो  जाने के कारन  वो  अभी   सिर्फ    36 साल  की  ही  थी  और  उनका    फिगर  बहुत  मेंटेन  था   उनको देखकर  किसी  भी  जवान  और  बुड्डे   के  जोश  आ  सकता  है  और  उनकी  चूची  भी  अभी  ज्यादा  बड़ी  नाहि   थी  हमारे  पड़ोस   में  एक   चाची   रहती  थी  जिनकी  ऐज   करीब  40 साल  की  रही  होगी  जब  पापा  नहीं  रहते  तो  वो  अक्सर  घर  आ  जाया  करती  थी  एक  दिन  जब  मैं  नह  रहा  था   तब  चाची  आ  गयी  और  मम्मी   से  बातें  करने  लगी

और  तब  वो  बोली  की  करीना  एक  बात  बताओ  जब  तुम्हारे
 पति  चले  जाते  है  और  महीनों  के  बाद  आते  है  तब  तुम  क्या  करती  हो  तब  मम्मी  बोली  की  करना  क्या  है  बस  बर्दास्त  करती  हूँ  आग  लगी  रहती  है  और  उनकि  याद  बहुत  आती   है  तो  मोमबत्ती  से  काम  चला  लेती  हूँ  और  फिर  मां   ने  चाची   से  पुछा  जब  तुम्हारे  पति  बहार  जाते  है  तब  आप  क्या  करती   हो ?  और  दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मैं  नह  चूका  था  पर  फिर  भी  दोनों  की  बातें  सुनने  को  वहीँ  रुक  रहा  और  फिर  मैंने  चाची   की  आवाज़  सुनी  की  भाई  मैं  तो  अपना  मसला  हलकर   लेती  हूँ  तेरी  तरह  मोमबत्ती  से  काम  नहीं  चलाती  हूँ  तब  मम्मी  ने  पुछा  की  भला  कैसे ?तब  चाची   बोली  की  मैं  अपने  बेटे  वीरू  से  अपनी  प्यास  शांत  करती  हूँ  मम्मी  ने  पुछा  की  मतलब  क्या  तू  अपने  बेटे  से  चुदवाती  है ?तब  चाची   बोली  हाँ  मेरी  रानी  बहुत  मज़ा  आता  है  वीरू  से  चुदवाने  में  बहुत  मोटा  और  लम्बा  है  उसका  लंड  पूरी  तरह  से  जवान  कर  देता  है  मुझे  तो  वो  तब  मम्मी  ने  कहा  हटिये  मुझे  शर्म  आती  है  तब  चाची   ने  मम्मी  की  चूची  को  पकड़  लिया  और  मसलने  लगी  तब  मम्मी  आआअह  आआअह  करने  लगी  कहने  लगी

 की  रहने  दो  चाची   काहे  आग  लगा  रही  हो  आप  तो  अपने  लड़के  से  चुदवा  लोगी  मेरा  क्या  होगा ?तब  चाची    ने   कहा  की  आज  रात  को  मैं  तुमको  अपनी  चुदाई  का  सीन  दिखाउंगी  देखना  कैसे  चोदता  है  मेरा  लड़का  ओके  तो  आज  रात  ठीक  11pm पे  और  तभी  मैं  नहा   कर  सिर्फ  टॉवल   में  बहार  आ  गया  और  चाची   मुझे  बहुत  गौर  से  देखने  लगी  और  मैं  अपने   रूम  में  आ  गया  तब  चाची   बोलि  की  तेरा  राजू  भी  तो  पूरा  जवान  है  साली  इतना  अच्छा  माल  घर  में  है  और  मोमबत्ती  से  काम  चलाती  है  तब
 मम्मी  उन्हें  धत्त  कर  दी  और  वो  हस्ते  हुए  चली  गयी  और  जाते  जाते  11pm की  याद  दिल  गयी  और  रात  का   इंतज़ार  तो  मुझे  भी  था  और  रात  को  खान  खाने  के  बाद  मैं  अपने  रूम  में  चला  गया  और  वहीँ  से  चुप  newhindisexstory.com  कर  पड़ोस  का  नज़ारा  देखने  लगा  चाची   के  घर  के  सामने  वाली  खिड़की  हमारे  घर  के  सामने  ही  खुलती  ( दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। थी  जिसे  मम्मी  की  सुविधा  के  लिए  चाची   ने  खोल   दिया  था  और  आज  लाइट  भी  ऑफ  नहीं  की  थी  तब  ही  मैंने  देखा   की  चाची   सिर्फ  पेटीकोट    और  ब्लाउज  में  ही  रूम  में  आई  और

 मम्मी  की  तरफ   आँख   मार  कर    ऊँगली  से   राउण्ड   बना  कर  उसमे  ऊँगली  करने  लगी  और  तब  ही  उनका  लड़का  वीरू  सिर्फ  कच्छे   में  आया  और  चाची   की  चूचियां  हाथ   में   लेकर  मसलने  लगा और  फिर  मुह   में  भरकर  चूसने  लगा  चाची   बोली  साले  मादरचोद  पी  जा  सार  दूध  जैसे  की  बचपन  में  पीता  है  आज  जमकर  चूत    मार  मेरी  चाची   के  मुह  से  गाली   सुनकर    मेरे   साथ  साथ  माँ  की  तबियत  भी  हिरन  हो  गयी  हमने  सोचा  भी  नहीं  था  की  चाची   इतनी  अय्यास   होगी  और  तभी  वीरू
 ने  उनके   सारे   कपडे  उतार  कर  उनको  एक   चेयर   पर  बैठा  दिया  और  उनकी  टांगे   फैला  दी  जिसे  की  उनकी  चूत    साफ   नज़र  आ   रही  थी  और  बोला   की   यहाँ  जंगल   क्यों  उगा   रखा  है  झांटे  क्यों  नहीं  बनाति   तुझे  मालूम  है newhindisexstory.com की  मुझे  झांटे  पसंद  नहीं  फिर  भी  चाची   बोली  की   कल  बना  लूँगि   आज  तो  तू  मेर्री  प्यास  बुझा  और  तब  वीरू  ने  उनकी  टाँगे  उठा   कर  एक  दमदा  धक्का   मार  और  चाची   बहुत  जोर  से  चिल्ला   पड़ी  ऊऊउइ  इ   ईईईईइस्स्स्स   साले  हरामी  आज    मारने    का   इरादा  है  क्या   कुत्ते  निकाल  ले  अपना  लौडा    मुझे  बहुत  दर्द  हो  रहा  है  आज  और  तब  वीरू  ने  उसकी  चूचियां  मुह  में  भरकर  चूसने  लगा  तब  चची  को  कुछ   राहत    हुई    और  थोड़ी  देर  बाद  दोनों  झड  गए   और  सुस्त  होकर  वहीँ  पर  नंगे  ही  सो  गए   और  ये  सीन  देख  कर  मेरा  और  मम्मी  का    दिमाग  भी  खराब  हो  चूका  था. कैसी लगी मेरी चाची  की चुदाई कहानी ,अगर तुम मेरी सेक्स की कहानी पसंद करता है तो कृपया साझा करें,अगर तुम मेरी चाची  की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे add now Facebook.com/ShipraSharma

बड़ी दीदी की चुदाई की कहानी

दोस्तों, आज जो दीदी की चुदाई कहानी बताने जा रहा हू वो मेरी दूर की रिश्ते की एक बड़ी दीदी की चुदाई की हैं
मेरे घर में मेरे मां-पिताजी हैं और हमारे साथ मेरे दूर की रिश्ते की एक बड़ी दीदी भी रहती हैं.. जिनका नाम मोनी था। मैं उसे मोनी दीदी कहकर पुकारता था। वो मेरे माँ-बाप को अपना माँ-बाप ही मानती हैं।
यह कहानी आज से तीन साल पहले की है.. जब मेरे स्कूल की बोर्ड की परीक्षा शुरू होने वाली थीं और मैं परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग भी कर रहा था। मोनी काफी सुन्दर हैं, उसके जिस्म का नाप तब 34-26-35 था। वो बहुत गोरी एवं स्मार्ट है। जब भी मैं उन्हें अपने साथ बाइक पर बैठा कर कहीं ले जाता था.. तो लोग उसे भूखे कुत्तों की नजरों से देखते थे। मेरे द्वारा बार-बार ब्रेक लगाने से दीदी की बड़े-बड़े चूचे मेरी पीठ पर टकराते.. तो मुझे बड़ा मजा आता था।मैं सच कहूँ.. तो मैं उसे चोदना चाहता था.. पर मुझे डर लगता कि घर में वो कह ना दे.. ओैर मुझे उससे अपनी ये इच्छा कहने में भी झिझक होती थी।
मेरे पापा अपने बिजनेस के सिलसिले में हमेशा बाहर जाते रहते थे। घर पर बाहर का सारा काम मुझे ही करना पड़ता था। एक दिन मेरे मामा का फोन आया और मम्मी को अपने घर पूजा पर आने का न्यौता दिया।
मेरी मम्मी ने मुझसे कहा- राहुल.. तुम मुझे आलोक के यहाँ छोड़ दो।
मेरे मामा का नाम आलोक है। चूंकि मेरे पापा दो दिन पहले ही अपने बिजनेस के सिलसिले में नासिक गए हुए थे। तो मैं अपने बाइक पर मम्मी को मामा के यहाँ ले गया.. जो मेरे घर से मात्र 5 किलोमीटर दूर था और मैं वहाँ पहुंच कर टीवी देखने लगा।

इतने में मेरी दीदी ने मम्मी को फोन किया और कहा- मम्मी मैं कॉलेज से आ गई हूँ और घर में ताला लगा हुआ है.. आप कहाँ हो और राहुल भी घर पर नहीं है। मम्मी- बेटी.. राहुल मेरे साथ आलोक मामा के यहाँ आया हुआ है.. क्योंकि यहाँ पूजा है.. मैं नहीं आ सकती.. मुझे आने में रात हो जाएगी.. मैं राहुल को घर की चाबी देकर अभी घर भेजती हूँ.. तुम वहीं अपने भाई का इन्तजार कर लो। दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।  मैं चाभी लेकर घर पहुँचा तो देखा कि दीदी मेरे आने का बेसब्री से इन्तजार कर रही थीं।
मुझे देखकर उसे कुछ राहत हुई और बोली- चल.. ‘जल्दी खोल’.. मुझे प्यास लगी है।
मैं- क्या खोलूँ?
दीदी- दरवाजा और क्या?
मैं- मैं समझा कि कुछ और कह रही हो।

वो मुस्कुराते हुए मुझे तिरछी नजरों से देखते हुए घर के अन्दर प्रवेश कर गईं।
काफी गरमी होने की वजह से वो मुझसे एक गिलास पानी लाने की कह कर.. अपने कपड़े बदलने सीधे अपने कमरे में चली गई.. newhindisexstories.com और उसने जल्दबाजी के कारण अपने कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द नहीं किया। मैं उसे ठंडा पानी देने जैसे ही उसके कमरे में गया.. तो मैं उसे अपलक देखता ही रह गया और वो भी मुझे देख कर भौंचक्का रह गई कि क्या करे.. क्या ना करे। वो सिर्फ ब्रा में थी जो आधी खुली थी और आधी बंद थी और नीचे से वो बिल्कुल नंगी थी। मेरा 7 इंच का लौड़ा एकदम खड़ा सलामी दे रहा था, मैं तो जानबूझ कर ही उसके कमरे में उसे देखने के लिए गया था। दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
वो मुझे देखकर शरमा सी गई थी.. लेकिन मैंने उससे ‘सॉरी’ कहकर पानी जैसे ही दिया.. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- खोलो। मैंने कहा- क्या?

वो बोली- ज्यादा भोले मत बनो.. अभी थोड़ी देर पहले ही तो तुमने मुझसे पूछा था कि मैं क्या खोलूँ?
वो अब भी ब्रा में ही थी और मेरा लौड़ा एकदम टाइट होकर आगे की तरफ साफ नजर आ़ रहा था।
मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ा और जोर-जोर से दबाना और चूसना शुरू कर दिया।
वो ‘आह.. आह..’ की आवाज निकाल रही थी.. क्योंकि दीदी की चूचियां बहुत बड़ी थीं और मैं भी जन्मों से प्यासे की तरह उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था। थोड़ी देर बार मैं उसके होंठों को चूसने लगा और वो भी मुझे साथ देने लगी। अब मैं- उसके दोनों मम्मों को आजाद कर दिया और उसकी पैंटी को उतारने लगा। मैंने कहा- दीदी.. मैं अब आपको चोदना चाहता हूँ।
दीदी- तो तुझे रोका किसने है? चोद दे अपनी दीदी को और उसके तन-मन की प्यास को मिटा दे।
मैं- दीदी.. मैंने कभी किसी को आज तक चोदा नहीं है.. सिर्फ ब्लू-फिल्मों में ही देखा है।
वो मेरे लण्ड को अपने गोरे-गोरे हाथों से निकाल कर सहलाने लगी और मेरा लण्ड अपनी दीदी के बुर में जाने के लिए एकदम से तैयार हो चुका था। मैं अपनी दीदी की चिकनी की हुई बुर को अपने जीभ से चाटने लगा और अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को भी मसलने लगा।
वो अब बिल्कुल बदहवाश होने को थी। उसके मुँह से ‘सी… सी.. और आह.. आह..’ की आवाज निकल रही थी। वो उस वक्त गजब की माल लग रही थी।
दीदी- अब मत तरसा अपनी दीदी को और चोद दे मेरी प्यारी बुर को…
मैं उसके बाद 69 के आसन में अपनी अवस्था को बनाया। अब वो मेरे लंड को चूसने लगी और मैं उसकी बुर को जोर-जोर से चूसने लगा।
थोड़ी देर बाद दीदी स्खलित हो गई.. मैं उसकी बुर का सारा पानी पी गया।
मेरा भी माल गिर चुका था.. मगर अभी उसकी कुंवारी बुर को चोदने की मेरी तमन्ना तो बाकी ही थी।
मैंने newhindisexstories.com फ्रिज से आइसक्रीम निकाल कर अपना सोए हुए लंड पर लगाई और दीदी को चूसने के लिए बोला।
वो भी रंडी वाली नजरों से मेरे लंड को निहार रही थी और बड़े ही कामुक तरीके से अपने मुँह से मेरे लंड पर लगी आइसक्रीम को धीरे-धीरे खाने लगी।
जैसे-जैसे आइसक्रीम खत्म हो रही थी.. मेरा लंड उठता ही जा रहा था। फिर वो मेरे लंड को अपने गले तक घुसेड़ कर चूसने लगी.. मुझे तो जैसे जन्नत मिल गई हो। मैं बहुत ही आनन्द का अनुभव कर रहा था।
फिर मैंने दीदी को पलंग पर सीधा लिटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख कर और अपना तन्नाया हुआ लवड़ा.. दीदी की लाल बुर के छेद पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा।
‘उई मां.. मार दिया साला.. हरामी.. बहनचोद.. छोड़ मुझे..’
वो इतनी जोर से चीखी कि क्या बताऊँ? मैंने उसके मुँह को चूमना शुरू कर दिया।
उसके बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने जोर-जोर से उसकी बुर के अन्दर अपने लम्बे लंड से चोटें मारने लगा। वो भी अब मेरा साथ देने लगी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था.. वो भी अपनी आंखें मूंदकर मजे का अनुभव ले रही थी.. मानो वो कितने जन्मों से चुदवाने के लिए तरस रही हो।
आप सबको तो पता ही होगा कि लड़का का एक बार झड़ने के बाद दूसरी बार देर से झड़ता है.. इसलिए मैं इस बार उसे 25 मिनट तक जोर-जोर से चोदता रहा था।
‘आई.. मर गई.. फाड़ डाल.. चोद मेरे लाल.. चोद.. अपनी बहन की बुर का भोसड़ा बना दे.. ताकि कोई इसे दुबारा ना फाड़ सके।’ दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
उसकी इस तरह की बातों से मुझे और जोश आता और मैं ओैर जोर से मारता। अन्त में मैंने अपना वीर्य उसकी बुर में ही गिरा दिया.. क्योंकि मुझे पहले से कोई अनुभव नहीं था।  हमारी भाई बहन चुदाई के बाद हम दोनों ने साथ में नहाया और एक-दूसरे के अंगों पर साबुन लगाया। उस दिन की चुदाई के बाद.. अब जब भी मौका मिलता हम दोनों नए-नए स्टाइल में चुदाई का खेल खेलते। वो एक बार गलती से प्रेगनेन्ट भी हो गई थी। उस गलती के अनुभव के बाद तो मैंने उसको और कईयों को संभल कर चोदा। अच्छा दोस्तों.. अब अभी बस इतना ही.. मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है..मुठ मारना पड़ेगी। अपनी चुदाई की एक नई कहानी अगली बार पेश करूँगा। कैसी लगी मेरी दीदी की चुदाई कहानी ,अगर तुम मेरी सेक्स की कहानी पसंद करता है तो कृपया साझा करें,अगर तुम मेरी दीदी की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे add now > Facebook.com/MoniSharma


मा की चूत और गांड मे चुदाई

दोस्तों आज जो मा बेटा की चुदाई कहानी बताने जा रहा हू वो मेरी मां की चुदाई की हैं . में अपनी माँ के साथ एक गावं में रहता हूँ. मैने शहर के एक स्कूल से 12 वी पास की और गावं में आ गया अपनी माँ के साथ रहने और खेती बाड़ी संभालने. मेरी माँ चाहती थी की मैं शहर में ही रहूँ पर मेरे पापा ने ज़ोर देकर कहाँ की अब मुझे ही खेती बाड़ी संभालनी हैं तो मैं गावं मे आ गया. मेरे पापा शहर में रहते हैं और महीने मे एक बार ही घर पर आते हैं. हमारे घर पर दो कमरे थे, एक मेरा और दूसरा मेरी माँ का मेरी उम्र 19 साल है और माँ की 40 साल है. मेरी माँ एक बहुत ही कामुक औरत है. माँ वैसे तो घर मे साड़ी, ब्लाउज और लहंगा पहनती है पर रात को सोते समय अपना लहंगा खोल कर सिर्फ़ ब्लाउज और साड़ी पहन लेती है. मेरी माँ के स्तन 38 साइज़ के हैं और उसकी गांड बहुत टाइट दिखती है. रात को सोते समय अक्सर मैं उनके बोबो को देख सकता हूँ उनके ब्लाउज  से झाकते हुये जब वो सो रही होती है तब एक दिन मैने उनकी जाँघ देख ली. वो सो रही थी और उनकी साड़ी जाँघ पर आ गयी थी तो मैने उसकी सफेद सफेद जाँघ देख ली. मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया और मैं जल्दी से बाथरूम मे जाकर मूठ मारकर आ गया. मैने सोचा पता नहीं माँ नंगी केसी दिखती होगी.
मेरे जाने के कुछ दिनो बाद से ही मैने देखा की माँ थोड़ी बेचैन है. मैने पूछा तो माँ बोली की कोई परेशानी नहीं है. कुछ दिनो के बाद मेरे ताऊ जी आये. उनकी उम्र 60 साल थी. मैने देखा की माँ बहुत खुश लग रही है. ताऊ जी को रात को रहना था हमारे घर पर और अगले दिन सुबह को अपने गावं  लौटना था. ताऊ जी को दूसरा कमरा देकर माँ बोली की मैं रात को उनके साथ ही बिस्तर पर सो जाऊ. रात को में और माँ बिस्तर पर सो गये. अचानक कुछ आवाज़ से मेरी नींद टूटी तो देखा की माँ कमरे का दरवाज़ा बंद करके कहीं जा रही है. मैने सोचा रात को माँ कहाँ जा रही होगी. मैं उठा और दूसरे दरवाज़े से बाहर आकर देखा की माँ ताऊ जी के कमरे मे जा रही है. में जल्दी से खिड़की के पास गया और उसमे से चुपके चुपके देखने लगा. (दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।)
माँ के घुसते ही ताऊ जी बोले, कितनी देर लगा दी तुमने शीला,  कब से मेरा लंड फनफना रहा है, माँ  बोली, सुनील के सोने का इंतज़ार कर रही थी मैं तो. चूत तो मेरी भी कब से पानी छोड़ रही है आप के  सांड जैसा लंड के बारे में सोच के, अभी वो सो गया है. मैं भी बहुत बेचैन हूँ आपके लंड को सहलाने के लिये. देखिये ना मेरी चूत कैसे तड़प रही है आपके लंड को पाने के लिए. यह बोलकर माँ ने जल्दी से अपनी साड़ी कमर तक उठाई और ताऊ जी को मां ने अपनी चूत दिखाने लगी. मैने भी माँ की चूत को देखा वो किसी चीनी के बर्तन की तरह साफ थी बाल का तो कोई निशान भी नही था, ताऊ जी ने झट से अपनी हथेली उसकी चूत पे रख दी और उसे घिसने लगे. माँ अपने हाथ को ताऊ जी की लूँगी के पास लेकर  गई और उसे खोल दिया. जैसे ही माँ ने ताऊ जी का लंड देखा “है हाय दइया 4 साल पहले भी तो आप से ही चुदवाती थी पर उस वक़्त तो इतना बड़ा नही था. ताऊ जी बोले सर्जरी करवाई है मेरी कुत्तिया, चल अपने कपड़े उतार और जल्दी से नंगी हो जा. 4 साल हो गये तुझे चोदे हुये.
अब मैं समझा क्यो माँ चाहती थी की मैं शहर मे ही रहूं. जिससे की वो ताऊ जी से चुदवाती रहे. अब माँ जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगी और अपनी चोली और साड़ी को उतार फेंका. तब तक ताऊ जी  भी नंगे हो गये. अब मैने माँ को पूरी तरह नंगा देखा. मां की बोबे बहुत बड़े बड़े थे और उसके निपल तो एकदम खड़े थे. ताऊ जी का लंड करीब 8 इंच का होगा अब ताऊ जी लेट गये और माँ झट से ताऊ जी  के ऊपर 69 के पोज़िशन मे हो गये. ताऊ जी ने माँ की चूत को चाटना चालू किया और माँ ने ताऊ जी  के लंड को चूसने लगी. माँ ने अपने मुँह मे ताऊ जी के लंड को ले लिया और उसको पूरी तरह से अपने मुँह मे घुसाने लगी. उधर ताऊ जी माँ की चूत को चाटने के साथ साथ उसके अंदर अपनी दो उंगली डाल  दी और आगे पीछे करने लगे. माँ धीरे धीरे ऊऊुउउइईई माआअ…..आआहह…….ऊऊओह….करते हुये  सिसकियाँ लेने लगी। माँ बोली… आप की उंगली भी किसी कमजोर लंड जैसी है भैया…. माँ अब ताऊ जी के लंड को बहुत ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी और उनके अन्डो (बॉल्स) को दबाने लगी. (दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।)
ताऊ जी बोले, साली मेरा माल मुँह मे ही ले लेगी तो तेरी चूत मे लंड कौन डालेगा. चल सीधी होकर मेरे लंड पर बैठ जा और सवारी शुरू कर दे. माँ कुछ देर तक वैसे ही लंड को चूसती रही फिर उठकर सीधी हो गयी और ताऊ जी के पैरो के बीच में बैठ कर उसके लंड को हाथ से मसलने लगी. फिर माँ झुकी और ताऊ जी के लंड को चाटने लगी और newhindisexstory.com फिर उसे पूरा मुहँ मे घुसा लिया. ऐसा करते समय माँ की गांड ऊपर हो गयी और मुझे उसकी गांड और चूत दोनो का एक साथ दर्शन हो गये. तब मैने देखा की माँ जैसे जैसे ताऊ जी का लंड चूसती ताऊ जी भी अपने पैर के अंगूठे से माँ की चूत पर घिसते जाते. अचानक मैने देखा की ताऊ जी का अंगूठा पूरा माँ की चूत मे चला गया है और माँ अचानक ही एक ज़ोर की सिसकी लेकर ताऊ के ऊपर लेट गयी. में समझ गया की माँ ने अपना पानी छोड़ दिया ताऊ जी  पर ताऊ जी ने अब माँ की चूची से खेलना शुरू किया और उसे मुहँ मे ले लिया. और दूसरी चूची को वो हाथ से दबाने लगे और उसकी घुंडी को मसलने लगे. माँ एकदम से फिर गरम हो गयी और ताऊ जी  के लंड से खेलना शुरू कर दिया. अब माँ ताऊ जी के लंड को हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के पास लाई और धीरे से उस पेर बैठ गयी और मां ने ताऊ जी लंड को अपनी चूत मे डाल दिया.में तो काफ़ी पहले ही गरम हो गया था और अपने लंड को हाथ से घिस रहा था. जैसे ही माँ की चूत  में ताऊ का लंड पूरी तरह गया मैने अपना माल छोड़ दिया चड्डी के अंदर ही.
अब माँ बड़े ही मज़े से ताऊ के लंड की सवारी कर रही थी और ताऊ भी मज़े से माँ के बोबो से खेल रहे थे. इसी बीच माँ ऊऊुउउइईई माआ आआआहह ऊऊऊुउउइईई करते हुये एक और बार पानी छोड़ दिया. ताऊ ने तब उसे अपने लंड से उतारा और बिस्तर पर उसे लिटा कर मां की चूत मे अपना लंड डाल दिया  और धक्के मारने शुरू किये. उनका पूरा लंड माँ की चूत मे घुस गया था और उनका थैला माँ की चूत  के नीचे जाकर धक्के मार रहा था.
माँ के मुहँ से उऊउक्कककक उउउम्म्म्मम ऊओउउइईई ऊओफफफफ्फ आआआह्ह्ह की आवाज़े निकल रही थी और उसने अपनी आखें बंद कर ली थी. अचानक ताऊ बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगे और थोड़ी देर मे उसने अपना पूरा गरम माल माँ की चूत मे छोड़ दिया. मुझसे सहा नही गया और मैने एकबार फिर अपनी चड्डी मे अपना माल छोड़ दिया. इसके बाद मैं जाकर सो गया. शायद माँ और ताऊ  ने एक और बार और चुदाई की और फिर सो गये. सुबह को ताऊ अपने गावं चले गये. उसके बाद वाले  दिन रात को माँ मुझसे बोली  बेटा आज तू मेरे साथ ही सो जाना.  मैं बहुत खुश हुआ की शायद आज मुझे माँ को आधा नंगा देखने मिलेगा. मैं रात को चड्डी में माँ के बिस्तर पर लेट गया. (दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।)
थोड़ी देर मे माँ आई और मेरी तरफ अपनी पीठ करके अपनी चोली उतार दी. उसने सोचा शायद में सो गया. अब तक माँ की एक चूची पर से साड़ी हट गई थी और मेरी आँखों के सामने उसकी एक चूची थी. यह देख मेरा लंड तन गया. में माँ की तरफ मुहँ करके सो गया वो करवटे बदलते बदलते माँ का हाथ मेरे लंड को टच हो गया. वो गरमा गई. फिर एक नाखून से लंड की टोपी को धीरे से घिसने लगी. में भी आगे पीछे होने लगा. मेरा तना हुआ लंड अब उनके सामने था. माँ बोली,” ऊई माँ यह क्या है तेरे जाँघो के बीच मे इतना बड़ा सा बेटा तेरा लंड तो बिल्कुल तना हुआ है और तेरी झांटे भी बहुत घनी है. तेरा लंड तो बहुत बड़ा है बेटा यह कैसे हो गया? ‘में बोला,”माँ में भी जवान हो गया हूँ. पर यह अभी पूरा बड़ा कहाँ हुआ है, अभी तो थोड़ा बाकी है. हाथ से सहलाने से पूरा बड़ा हो जायेगा.”माँ बोली, “अरे बेटा मुझे मालूम ना था की तू इतना बड़ा हथियार घर में ही लेकर घूम रहा है नही तो दिन में 4 – 4 बार चुदवाती तुझसे पर तेरा ये लंड तो सचमुच ही बहुत बड़ा है.
क्या में इसे थोड़ा सहलाके देखूं और कितना बड़ा हो सकता है?”यह बोलकर माँ ने झट से मेरा लंड अपने हाथ मे ले लिया और उसे घिसने लगी जिससे की वो बिल्कुल खड़ा हो गया. अब माँ बोली, “ बेटा तेरा लंड क्या हमेशा इतना बड़ा रहता है? में बोला, नही माँ तेरी गांड देख कर ऐसा हो गया है. माँ  अरे शैतान तेरा लंड अपनी माँ की गांड देख कर बड़ा हो गया है. में तुझे मज़ा चखाती हूँ. यह बोल माँ ने मेरा लंड अपने मुँह के पास ले गयी और लंड की टोपी को चूसने लगी. में तड़प उठा. माँ हंसकर बोली, “तुझे आज में पूरा मज़ा चखाती हूँ.”फिर माँ ने मेरे पूरे लंड को अपने मुहँ मे ले लिया और धीरे धीरे चूसने लगी साथ ही मेरे अन्डो (बॉल्स) को हाथों से मसलने लगी. अब माँ ने मेरा पूरा लंड अपने मुहँ मे ले लिया और ज़ोर ज़ोर से अपना मुहँ ऊपर नीचे करने लग गई. में अपना लंड माँ के मुहँ से बाहर आते और अंदर जाते हुए देखने लगा. फिर माँ ने मेरे लंड को निकाल कर मेरे अन्डो से खेलने लगी और उन्हे चाटने लगी फिर अचानक से पुरे थैले को मुँह मे लेकर चूसने लगी. में सुख से कराह उठा. थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा और फिर माँ मेरे पास लेट गयी और मैने उसके बोबो को मुहँ मे लेकर चूसना शुरू कर दिया. साथ ही मैने अपना दूसरा हाथ माँ के साड़ी के अंदर डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा. माँ की चूत से पानी निकल रहा था. माँ बोली, “अरे बेटे मेरे लाल ज़रा मेरे नीचे वाले होठों को चूस कर मुझे मज़ा दे मेरी जवानी का चल अपनी माँ की साड़ी उतार कर नंगा कर दे.
मुझसे रहा नही गया और मैने झट से उसकी साड़ी उतार दी और उसे नंगा कर दिया. माँ ने अपने पैर फैला दिए थे और मेरा सर उसकी चूत की तरफ खिचने लगी. में जल्दी से मां की चूत को चाटने लगा. उसकी चूत बहुत फूली हुई थी और उसकी चूत के होठ एकदम खुले हुए थे. उसमे से उसका रस भी निकल रहा था. मैने अपना मुहँ उसकी चूत पर लगा दिया और उसके चूत के होठों को फैला कर उसकी  चूत के अन्दर भी अपनी जीभ घुसा दी और उसे अपनी जीभ से चोदने लगा. माँ को बहुत मज़ा आ रहा था. उस पर बाल नही थे मैने पूछा माँ तुम्हरे बाल क्यो नही है बेटा ऐसे ही नहीं हे इस पर घास नहीं  उगती, तुम्हारी माँ की ये सड़क भी तो चलती ही रहती है. (दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।)
थोड़ी देर बाद माँ बोली,  अब तू लेट जा और में तेरी सवारी करती हूँ. में जल्दी से लेट गया और माँ मेरे दोनो तरफ अपने पैर फैला कर मेरे लंड के ऊपर धीरे धीरे बैठने लगी. जल्दी ही मेरा लंड माँ  की चूत मे था. उसकी गरम चूत मुझे बहुत गर्म कर चुकी थी. इसके बाद माँ धीरे धीरे मेरी सवारी करने लगी और आगे पीछे होने लगी. दस मिनिट तक माँ मुझे चोदती रही और फिर झड़ गयी. अब मैने माँ  को लिटाया और जल्दी से मां की चूत मे अपना लंड डाल दिया और उसे घपाघप चोदने लगा. माँ अपनी गांड उछाल उछाल के मेरा साथ देने लगी. माँ ने अपने पैर पूरे फैला दिये जिससे की में पूरी तरह उसकी  चूत मे लंड डाल सकूँ. मेरा थैला उसकी चूत से टकराने लगा और माँ मज़े से चुदवाती रही. करीब बीस मिनिट तक लंड पेलने के बाद मुझे लगा में झड़ने वाला हूँ और माँ भी समझ गयी तो उसने मुझे अपने अंदर ही झड़ने के लिये बोल दिया और में वैसे लंड पेलते हुए उसके अन्दर झड़ गया.
फिर में माँ से पूछने लगा की किस किस से चूत ढीली करवाई है तो माँ बोली एक तो तेरे नाना जब में 14 साल की थी वो धमाधम चोदते थे. मेरे चारो भाई और जब में मार्केट जाती तो एक या दो से ढीली करवा आती वो मुझे याद नही, पर बेटा आज तक एक भी दिन नही गया जब मेरी चूत में कुछ ना गया हो लंड नही तो मूली,
फिर मैने माँ से पूछा कभी गांड मरवाई है, माँ नही वो मरवानी भी नही. newhindisexstory.com मैने कहाँ में मारना चाहता हूँ वो बोली मुझे मेरे पिया की कसम कभी नही करना वैसा मुझे, में बोला.में तो बस ऐसे ही पूछ रहा था माँ
2 दिन बाद में और माँ सेक्सी मूवी देख रहे थे उसमें लड़का लड़की को उल्टा कर उसके हाथ बेड की एक साइड बाँध दिया फिर उसकी चुदाई की तभी मेरे दिमाग़ में आइडिया आया माँ की गांड की धज्जियाँ उड़ा दुगां. मैने माँ को वैसे ही सेक्स करने को कहाँ वो तो तैयार बैठी थी, मैने माँ के हाथ बेड के आगे और पैर पीछे बांध कर उसे फ्लाईगं सूपरमैन की पोज़िशन में किया ताकि में गांड मार सकूं, मेंने माँ की चूत में उंगली डाली गीली थी में वहाँ से ही पानी उस की गांड में लगाने लगा और बीच की उंगली घप से डाल दी. माँ को चाल समझ आ गई बोली, कुत्ते गांड का ख्याल दिमाग से निकाल दे, मै लंड पर तेल की मालिश करने लगा माँ की आँखों में डर के आंसू आ गये. 8 इंच का लंड गांड का छेद सदा के लिये खोल देगा, (दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।)
मैने कहाँ लंड के लिये रेडी हो जा माँ, नही बेटा ऐसा नहीं करते, में लंड को छेद पर रख कर एक तूफ़ानी झटका मारा और अन्डो तक मेरा लंड माँ की गांड मे धँस दिया, वो चिड़िया की तरह झटपटा उठी उसके मुहँ से खुल के चीख निकली आआआआआआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई में सारा लंड माँ की गांड में डाल कर 16 मिनिट तक वैसे ही लेटा रहा और माँ के चुप होने का इंतज़ार करता रहा, 15 मिनिट बाद वो सिर्फ धीरे धीरे ही रो रही थी फिर में धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा, वो फिर रोने लगी मैने 1 घंटे तक माँ की गांड मारी जब मेरा होने वाला होता तब में थोड़ी देर रुक जाता और  अपनी उंगली डाल देता जब मैने गांड से लंड बाहर निकाला मुझे माँ पर तरस आ गया माँ की गांड का छेद 2 रुपये के सिक्के जितना बड़ा हो गया था. और बेड पर थोड़ा खून भी गिर रहा था. उस रात माँ की 6 बार गांड मारी माँ ने पेशाब भी बेड पे ही कर दिया. 3 दिन तक माँ टॉयलेट नही जा पाई 2 दिन तक छेद पर उंगली रखती और कहँती हराम के देख कितनी खोल के रख दी. मैने कहाँ सॉरी माँ, फिर धीरे धीरे माँ को भी गांड चुदवाने में मजा आने लगा. कैसी लगी मेरी मां की चुदाई कहानी ,अगर तुम मेरी सेक्स की कहानी पसंद करता है तो कृपया साझा करें,अगर तुम मेरी मां की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे add now Facebook.com/PurnimaRani


बाप बेटी की सेक्स कहानियां हिंदी

हेलो दोस्तों, आज जो बाप और बेटी की सेक्स कहानियां बताने जा रहा हू वो मेरी पापा के साथ सेक्स की कहानी की हैं . ये बाप ओर बेटी की चुदाई की कहानी है . मेरी मदर की 3 साल पहले ट्रॅफिक एक्सीडेंट मैं डेत हो गई थी. उस वक़्त मैं कोई 16 साल की थी और अपने पापा की अकेली बेटी थी. हम लोग काफ़ी साल पहले हयदेराबाद से रावलपिंडी शिफ्ट हो गये थे. यहाँ पिंडी मैं सिवाइ हमारे एक दो फॅमिली फ्रेंड्स के और कोई रिश्तेदार ना था. बस हम तीनो अकेले रहते थे. मम्मी की डेत के बाद हम सिर्फ़ 2 रह गये थे.घर के एक कमरे मैं जोकि बाहर कमर्षियल स्ट्रीट की तरफ खुलता था, पापा ने बोहट अछा जनरल स्ट्रोरे खोला हुआ था जिस से हमारी बहुत अछी इनकम होती थी. मम्मी के जाने के बाद मुझे भी तन्हाई महसूस नही होती थी. सुबा मैं स्कूल चली जाती. काम वाली सुबा घर की सफाई वगेरा कर के खाना तय्यार कर के चली जाती. स्कूल से वापसी पेर हम दोनो बाप बेटी साथ खाना खाते. मम्मी की कमी बहुत महसूस होती थी. इसी तरह एक साल गुज़र गया. और मुझे यह कभी भी एहसास ना हुआ के अगर मुहज़े मम्मी की कमी महसूस होती है तो पापा का क्या हाल होता होगा. मैं जवानी की हदों को छू रही थी. मेरी छातियाँ अछी ख़ासी निकल आई थी.
अक्सर मेरी चूत मैं भी मीठी मीठी खारिश होती थी. मगर ना मैं इन सब चीज़ों का मतलब जान सकी और ना ये महसूस कर सकी कि पापा मम्मी के बाद सेक्स को कितना मिस करते होंगे.फिर एक रात वो हुआ जिसने हम दोनो बाप बेटी की ज़िंदगी बदल दी.
जुलाइ की रात थी. बहुत शेडेड गर्मी के बाद बहुत तेज़ बेरिश हो रही थी. बादल बहुत ज़ोर ज़ोर से गरज रहे थे. मैं अपने कमरे मैं सहमी हुई सोने की कोशिश कर रही थी, मगर डर के मारे नींद नही आ रही थी. अचानक जो एक दफ़ा बदल बहुत ज़ोर से गर्जे तो मेरी चीख निकल गई और मैं बेड से उठ कर पापा के बेडरूम की तरफ भागी.जल्दी से मैने पापा के बेडरूम का दरवाज़ा खोला और पापा के बेड के बिल्कुल सामने जा खरी हुई. सूब कुछ इतना जल्दी मैं हुआ के मैं बेडरूम का दरवाज़ा खोलते हुआी यह भी ना देख सकी के मेरे पियारे पापा उस वक़्त अपने बेड पेर बिल्कुल नंगे हो कर अपने तने हुए सख़्त लंड को अपनी मुथि मैं पकरे, मुथि को लंड पेर ऊपर नीचे कर रहे थे. मैं ने ज़िंदगी मैं पहली बार लंड को इतना बरा (बिग) देखा था. पापा को भी मोक़ा ना मिल सका के वो अपने जिस्म पेर शीट डाल लेते. उनका मुँह खुला का खुला रह गया.मेरे भी मुँह से सिवाए इसके और कुछ ना निकल सका Newhindisexstory.com "सॉरी पापा, मैं डर गई थी, इस लिये जिलदी मैं डोर पेर नॉक नही कर सकी".
पापा ने इतनी देर मैं अपने ऊपेर शीट डाल ली और घबरा कर उठ कर बेड पेर बैठ गाए, और बोले: "सॉरी बेटा के तुम ने मुझे इस"तरह देख लिया
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आ जाओ और यहाँ मेरे पास बैठ जाओ. जब बारिश रुक जाए तो चली जाना अपने बेडरूम मैं".
"मगर पापा ..... आप डिस्टर्ब होंगे. आप कुत्छ कर रहे थे अभी?"
लेकिन पापा ने जवाब देने की बजाए मुझे हाथ पकड़ कर अपने साथ बेड पर बिठा लिया.
"पापा आप ने कुत्छ नही पहना ... मुझे शरम आती है." यह कहते हुए मुझे खुद अपने बारे मैं एहसास हुआ के मैं ने भी गर्मी की वजह से सिर्फ़ एक थी सी, सी-थ्रू क़िसम की टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी हुई थी. ब्रा भी नही पहनी थी, इस लिये मेरा जिस्म भी बिल्कुल रिवील हो रहा था. टी-शर्ट भागते हुए ऊपेर हो गई ही, जिस की वजह से मेरा पेट और मेरे टिट्स साफ नज़र आ रहे थे.एक तरफ पापा को मैं नंगा अपना लंड पकड़े देख चुकी थी, और अब वो शीट डाले बैठे थे के पीछे से उनकी कमर नीचे तक नंगी थी. और दूसरी तरफ मैं भी सेमी-नेकेड उनके ब्राबार बैठी हुई थी. मेरी साँस फूल रही थी.
मुझे उस रात पापा के बराबर बैठ कर पहली दफ़ा एहसास हुआ के मेरा जिस्म बहुत सेक्सी है. मेरे बूब्स मेरी 13 साल की एज के मुक़ाबले मैं ज़ियादा बिग और राउंड हैं और सामने को निकले हुए हैं. मेरे हिप्स बहुत राउंड, हार्ड और बल्जिंग हैं. मेरा जिस्म भरा भरा लगता है.अचानक बारिश का शोर और ज़ियादा हो गया और साथ ही बदल एक बार फिर बहुत ज़ोर से गर्जे के मैं डर के मारे एक दम पापा से लिपट गई. इस तरह लिपटने से पापा की शीट हट गई, और पापा फिर से नंगे हो गाए. मैं कोई 10 सेकेंड यूँही लिपटी रही, टब मुझे पता चला के मैं अपने पापा के नंगे जिसम से लिपटी हुई हूँ.
मैं ने घबरा कर पापा से अलग हो ने की कोशिश की तो पापा ने मेरी कमर मैं अपना हाथ डाल कर मुझे मज़बूती से अपने नंगे जिसम के साथ जाकड़ लिया.
"जानू ऐसे ही बैठी रहो"
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मैं कुत्छ ना जवाब दे सकी. मैं पापा के लेफ्ट साइड से लिपटी हुई थी. मेरा सर पापा के सीने पर था. शीट हट जाने की वजह से पापा का खरा हुआ लंड मेरे फेस से एक फीट के फ़ासले पर था. पापा ने एक बार फिर अपने लंड को राइट हॅंड की मुथि मे जाकड़ लिया और हाथ को लंड पर आहिस्ता आहिस्ता ऊपेर नीचे करने लगे.
"पापा यह आप किया कर रहें हैं?"
"आज तुम्हारी मम्मी की बोहत याद आ रही हे" पापा ने जवाब दिया.
"छी पापा, जुब मम्मी की याद आती हे तो आप ऐसे करते हैं?"
"बेटा, वो तुम्हारी मा थी, लेकिन मेरी बीवी थी, और मियाँ बीवी का रिश्ता और तरह का होता हे".
"मैं समझी नही पापा!"
"बेटी क्या तुम्हे नही पता मियाँ बीवी का क्या जिन्सी रिश्ता होता हे?" पापा ने पूछा
"नही पापा, आप बताएँ"
"अब मैं कैसे तुम्हें बताऊं के मियाँ बीवी मैं सेक्स का रिश्ता होता. और इसी रिश्ते की वजह से तुम पैदा हुईं और आज तुम मेरे साथ इस तरह बैठी हो"
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"वो कैसे पापा?" मेरी समझ मैं अब भी नहीं आ रहा था.
"शादी के बाद मियाँ अपनी बीवी के साथ सेक्स करता हे, यानी अपनी बीवी तो इस लंड से उसकी चूत को चोद्ता है. चोदते हुए जुब लंड से मनी चूत मैं निकलती है तो फिर 9 मंथ बाद बच्चा पैदा होता हे".
लंड और चूत का नाम तो मैं ने कहीं सुन रखा था, मगर "चोद्ता" मैं ने पहली बार सुना था.
"पापा यह "चोदता" क्या होता हे?"पापा की साँस आहिस्ता आहिस्ता फूल रही थी. शिवरिंग सी आवाज़ मैं वो बोले.
"अब इस से आगे मैं जो तुम्हे बताऊँगा तो उसके लिये तुम्हे भी मेरी तरह कपड़े उतार कर नंगी होना परे गा. क्या तुम तय्यार हो."
मैं पापा की बात सुन कर बुरी तरह शर्मा गई और उनकी ग्रिफ्त से निकालने की कोशिश करने लगी.
लेकिन पापा ने ज़बरदस्ती मेरी शॉर्ट्स और टी-शर्ट उतार दी और हम दोनो बाप बेटी बिल्कुल नंगा होगाए.
अब पापा ने मेरा राइट हॅंड पकड़ कर अपना लंड मेरे हाथ मैं पकड़ा दिया, और साथ ही मेरी चिकनी और हेरलेस चूत पर उंगली फेरते हुए बोले."यह तुम ने मेरा लंड पकड़ा हुआ है और मैं तुम्हारी चूत पर उंगली फेर रहा हूँ. तुम्हे प्यार करते हुए अगर मैं अपने इस लंड को अपनी बेटी की चूत मैं डाल कर अपने लंड को तुम्हारी चूत मैं अंदर बाहर करूँ गा तो इसका मतलूब होगा के मैं तुम्हे चोद रहा हूँ, या तुम मुझ से चुदवा रही हो, और या मैं तुम्हे चोद्ता हूँ" मेरी चूत पर पापा की उंगली लगते ही मेरी चूत मैं करेंट सा दौर गया. पापा ने जब मेरी चूत के दाने को उंगली से छेड़ा तो मैं ने बुरी तरह से मचल कर पापा के हाथ को अपनी रानो के दरमियाँ भींच लिया. इस के साथ ही मैं ने पापा के लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी. पापा का लंड मेरी मुठ्ठी मैं किसी ज़िंदा मखलूक़ की तरह मचल रहा था. मुझे अब एहसास हो रहा था के सेक्स क्या होता हे.
"पापा लंड मेरी चूत मैं डाल कर मुझे चोद के दिखाएँ" मैं ने पापा से कहा."जानू तुम अभी कुँवारी हो, और मेरी सग़ी बेटी हो. पहली बात तो हमे ऐसा नहीं करना चाहिये. लेकिन एक साल से मेरा लंड किसी चूत को चोदने के लिये तड़प रहा हे. बाहर जा कर मैं रंडी को नही चोदना चाहता. अगर तुम्हारी मर्ज़ी हो तो फिर मैं अपनी बेटी को चोद कर दिखा सकता हूँ""पापा मैं अभी सिर्फ़ 13 साल की हूँ, लेकिन अभी अभी आप के मेरी चूत को हाथ लगाने से जो मेरी हालत हो रही है, तो मैं आप की हालत भी समझ सकती हूँ .. ... पापा चोद के दिखाएँ मुझे, ता के मुझे भी पता चले के आप मेरी मम्मी को कैसे चोद्ते थे ... और पापा मेरी शकल सूरत भी चूँके मम्मी से बोहत मिलती है, इस लिये आप को चोद्ते हुए लगे गा के आप अपनी बीवी को चोद रहें हैं..."
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"उफ़ जानू ... मेरी प्यारी बेटी ... तूने तो मेरी मुश्किल आसान करदी ...", यह कहते हुए पापा ने एक दम से उठा कर मुझे अपनी गौद मैं बिठा लिया. पापा का लंड मेरी रानो के बीच मैं से बाहर को निकल कर मेरे पेट से टच कर रहा था. पापा के लंड के मुँह से चिकना चिकना लेसडार पानी निकल कर मेरे पेट पर लग रहा था.
पापा ने मुझे अपने से लिपटा कर खूब मेरे मुँह पर, मेरे होंठो पर प्यार करना शुरू किया. मेरी दोनो छातियाँ पापा ने अपने हाथों मे पकड़ कर मसलनी शुरू करदी.मेरे पूरे जिस्म मे जैसे आग सी लग गई. मैं भी बे-इकतियार हो कर अपने पापा को उसी तरह चूमने चाटने लगी. मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रहीं थी. मेरा पूरा जिस्म शिद्दत-ए-जज़्बात से काँप रहा था. पापा ने प्यार करते करते मुझे बेड पर लिटा दिया और खुद अपना लंड हाथ मैं ले कर मेरे मुँह के ऊपेर आ गाए, और लंड की टोपी को मेरे होंठो से लगाते हुए बोले: "शहला, मेरी प्यारी सी बेटी, अपने पापा का लंड चूसो मुँह मैं ले कर. पापा के लंड से मनी निकालने वाली है, फिर इसके बाद मैं अपनी बेटी को चोदुन गा".
"पापा यह मनी क्या होती हे?"
"अभी जब तुम्हारे मुँह मैं निकले गी तो देख लेना. यह वाइट क्रीम या मलाई की तरह होती हे, और बोहट गरम और मज़ेदार होती हे. लो अब चूसो पापा का लंड."
मैं ने मुँह पूरा खोल दिया, और पापा ने अपना हड्डी की तरह सख़्त लंड मेरे मुँह मैं डाल दिया. मैं लंड मुँह मैं ले कर लंड को अपने लिप्स से दबा लिया, और पापा होले होले मेरे मुँह को चोदने लगे.
"उफ़ शहला .... जानू .... मज़ा आरहा है .... चोद रहा हूँ अपनी बेटी शहला के मुँह को. उफ़ ... .... निकलने वाली है पापा के लंड से मनी...."
और इसके बाद चंद ही लम्हे मैं पापा के लंड से एक तेज़ पिट्चकारी मेरी मुँह के अंदर निकली, और उसके बाद तो जैसे पिचकारियो की लाइन लग गई. मेरा मुँह पापा की गरम गरम मनी से भर गया. पापा की मनी मुँह से बाहर ना निकल जाइ, इस ख़याल से मैं काफ़ी मनी पी गई.पापा घहरी घहरी साँसे ले रहे थे और उनका लॉरा मेरे मुँह मैं ढीला परता जा रहा था.पापा ने आख़िर अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया. मुझे पापा का लंड देख कर हँसी आ गई के वो अब बिकुल सुकर कर लुल्ली बन गया था. हंस ने की वजह से पापा की बाक़ी मनी मेरे मुँह से बाहर निकल कर मेरी छातियों पर बहने लगी.
गाढ़ी गाढ़ी, सुफैद क्रीम जैसी लेसडार मनी. मनी मैं से एक अजीब सी खट्टी मीठी खुश्बू उठ रही थी (जैसे आटा गूंधने के बाद आती हे)."देखी अपने पापा की मनी? ऐसी होती है मनी. यह मनी जब लर्की या औरत की चूत के अंदर निकलती हे तो उस से औरत के पेट मैं बच्चा ठहर जाता है."मैं इतनी ज़ियादा गरम हो चुकी थी के मैं ने पापा की मनी अपनी टिट्स पर मल्नि शुरू करदी."बेटी मैं अब तुम्हारी चूत को चाटून गा ता के तुम्हारी नन्ही मुन्नी चूत पापा के मोटे सख़्त लंड को अंदर लेने के लिये तय्यार हो जाए."
आज मैं अपने Newhindisexstory.com प्यारे पापा से जो कुत्छ भी चुदवाने के नाम पर करवाने जा रही थी, यह मेरी ज़िंदगी का सब से अनोखा तजर्बा था. आअज से पहले मैं अपनी चूत को सिर्फ़ पेशाब करने की जगह समझती थी. मुझे आज पहली बार पता चला के चूत मैं ऐसी खारिश भी होती हे जो सिर्फ़ लंड से मिट ती हे. मुझे आज और अभी पता चला के चूत को चाट ते भी हैं.पापा अब खुद सीधे हो कर लेट गए और मुझे अपने ऊपेर आने को कहा. मैं पापा के ऊपेर इस तरह लेटी के मेरी चूत पापा के मुँह पर थी और पापा का दोबारा से खरा होता हुआ लंड मेरे होंठो के एन सामने था. दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

पापा ने पीछे से मेरी दोनो रानो को हाथ डाल कर खोलते हुए मेरी चूत को अपनी ज़बान से चाटना शुरू किया. पापा की ज़बान मेरी चूत मैं लगने की देर थी के मेरे सारे जिस्म मैं करेंट सा दौड़ने लगा. ऐसा ही करेंट जैसा बिजली के लाइव तार को छूने से होता हे. पापा की ज़बान मेरी चिकनी चिकनी नन्ही मुन्नी चूत के पंखों के बीच मैं घूम रही थ्री. कभी पापा मेरी चूत के दाने पर ज़बान फेरते, और मैं बुरी तरह से मचल जाती. फिर पापा उस जगह ज़बान फेरते जहाँ से मेरी पी निकलती हे. पी की जगह पेर ज़बान लगते ही मुझे अभी ज़ोर से पी आनी होने लगती के पापा एक दम मेरी चूत के चोदने वाले छेद मैं ज़बान डाल कर चाटना शुरू कर देते.
इधर मेरी आँखों के बिल्कुल सामने पापा का पूरी तरह तना हुआ लंड था. मैं इतने क़रीब से पापा के लंड को पहली दफ़ा देख रही थी और सोच रही थी के यही वो लंड है जिसने मम्मी को चोदा और उसकी वजह से मैं पैदा हुई, और आज खुद अपने बाप के ऊपेर लेट कर उसके लंड को सामने देख रही हूँ, हाथ मैं पकड़ रही हूँ और चूस रही हूँ, और पापा अपनी ही सग़ी बेटी की चूत को चाट और चूस रहे हैं."पापा मेरी चूत मैं बहुत खारिश हो रही हे ... उफ़ मर जाऊंगी ... पापा बहुत खुजली हो रही हे ..."

पापा ने जुब यह सुना तो मुहज़े अपने ऊपेर से उतार कर बेड पेर चित लिटा दिया, और मेरी टाँगों के बीच मैं घुटनो के बल बैठ कर बोले""जानू, अब पापा अपनी बेटी के साथ वो करने जा रहे हैं जो पापा तुम्हारी मम्मी के साथ करते थे. तय्यार हो तुम, शहला?""पापा क्या अब आप चोदन्गे मुझे? पापा बहुत मोटा और सख़्त लंड है आप का, और लंबा भी बहुत हे. इतना मोटा लंड कैसे मेरी चूत मैं जाएगा, पापा?"
"मैं ने अपनी बेटी की चूत चाट चाट कर इतनी चिकनी कर दी हे अब इस्मे हाथी का लंड भी चला जाएगा. डरो मूत शहला, मैं पहले सिर्फ़ अपने लंड के टोपी चूत मैं डालूँगा. फिर आहिस्ता आहिस्ता चोद्ते हुए पूरा लंड डालूं गा."यह कहते हुए पापा ने मेरी दोनो टांगे उठा कर अपने कांधों पर रखीं, और मेरी गोल गोल गांद के नीचे पिल्लो रख दिया, जिस से मेरी गांद और चूत बिल्कुल ऊपेर उठ गई. पापा मेरे उपर आ गए और मेरी दोनो टिट्स को पकड़ते हुए कहा: "शहला .. पहली दफ़ा तुम मुझ से चुदवा रही हो.. अच्छा हे के बेटी अपने बाप का लंड खुद अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत के छेद से लगाए."मैं और पापा फुल मस्ती मैं थे. मैं ने राइट हॅंड से पापा का तना हुआ लंड जो मेरे चूसने की वजह से चिकना हो रहा था, पकड़ कर उसकी टोपी को अपनी चूत के मुँह से लगाया.
पापा ने होले से अपने लंड को मेरी चूत मैं पुश किया, और इसके साथ ही मेरी चूत के छेद मैं पापा के लंड की टोपी फँस गई."मज़ा आया शहला?" पापा ने कहामेरी नज़रे पापा की नज़रों से मिली, और मैं शरम से आँखे बूँद करली. पापा ने बे इकतियार हो कर, मेरे गालों, मेरे होंठो और मेरी टिट्स को प्यार करना शुरू कर दिया.
अब जब के पापा का लंड अपनी बेटी की चूत मैं जा चुका था, तो मुझे शरम आ रही थी के आज मैं अपने ही सगे बाप से चुदवा रही हूँ.
"जानू, और लंड डालूं अंदर?"
मैं ने शरम से कुत्छ ना बोल पाई. पापा ने फिर कहा: "जानू, शर्मा क्यूँ रही हो अपने पापा से. अब तो पापा का लंड जा चुका हे तुम्हारी चिकनी चूत मैं. बोलो और डालूं अंदर; जानू मैं पूरी तरह लंड तुम्हारी चूत मैं डाल कर चोदना चाहता हूँ. वही सही चुदाई होती है".मैं फिर भी कुत्छ ना बोली और सिर्फ़ मेरे मुँह से आहिस्ता से "हूँ" निकल सका.पापा जैसे हे मेरी "हूँ" सुनी, और उन्हों ने एक हे झटके से अपना पूरा सख़्त और लंबा लंड मेरी चूत मैं डाल दिया. मेरी चूत चिकना चिकना पानी छोड़ रही थी, मगर फिर भी पहली दफ़ा तकलीफ़ की वजह से मेरी चीख निकल गई.
"मर गई पापा. दर्द हो रहा मेरी चूत मैं बहुत ज़ोर का. मेरी चूत फॅट गई पापा. उफ़ .... मर गई ..."
पापा ने मेरी टांगे अपने कांधो से उतार कर मेरे जिस्म को अपने जिस्म से सटा लिया. मेरी टांगे खुली हुई थी औरइस दर्मयान पापा का लंड पूरा का पूरा मेरी छोटी सी चूत मैं घुसा हुआ था. मेरी चीख सुन कर पापा ने मुझे प्यार करते हुए कहा: "जानू, पहली पहली बार दर्द होता है, 2 मिनिट मैं यह दर्द ख़तम हो जाए गा, और फिर मज़ा आने लगे गा. वैसे भी तुम्हारी चूत इस क़दर टाइट हे के रब्बर बॅंड की तरह मेरे लंड को जकड़ा हुआ है".

हम दोनो बाप बेटी कुत्छ देर तक उन्ही लिपटे रहे. इस दोरान पापा मुझे किस करते रहे. मेरी आँखों मैं तकलीफ़ की वजह से आँसू आ गए थे. पापा के प्यार करने से मैं ठीक होने लगी और मैं ने भी पापा के होंठो पेर प्यार करना शुरू किया. किस करते हुए पापा ने अपनी ज़बान मेरे मुँह मैं डाल दी, और मैं पापा की ज़बान को चूसने लगी. पापा की ज़बान से मुझे अपनी चूत का टेस्ट आ रहा था. मैं बहुत ज़्यादा गरम हो गई. उत्तेजना से मेरा बुरा हाल होने लगा. पापा ने मेरे बूब्स को चूसना शुरू किया, और मैं बुरी तरह मचलने लगी.
दर्द अब बिल्कुल ख़तम हो गया था और उसकी जगह वाक़ई अब मुझे इतना मज़ा आ रहा था के मैं बता नहीं सकती. मैं सोच रही थी के मम्मी भी इसी तरह पापा से चुदवाते हुए मज़ा लेती होंगी.जुब मज़ा मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया, और पापा उन्ही मेरे ऊपेर पड़े हुए थे, तो मुझ से रहा ना गया: "पापा, कुत्छ करो ना .... मेरी चूत मैं आग लगी हुई है ...."इस के साथ ही मैं ने नीचे से पापा को ऊपेर की तरफ पुश किया. पापा अपनी बेटी का इशारा समझ गये."चलो अब अपनी जानू को गौद मैं ले कर चोदुन गा"

यह कहते हुए पापा ने मुझे अपनी गौद मैं भर लिया; इस तरह के मेरी दोनो टांगे उन्हो ने अपनी कमर (वेस्ट) के गिर्द लपट लीं, और मेरे दोनो बाज़ू अपनी नेक के गिर्द लपट लिये, और इस तरह मेरी गांद को नीचे से पकड़ते हुए वो बेड से उतर कर मुझे गौद मैं ले कर फर्श पर खड़े हो गये. पापा का लंड उसी तरह से पूरा मेरी चूत मैं फँसा हुआ था.इसी तरह उठाए हुए पापा मुझे ड्रेसिंग रूम के फुल साइज़ मिरर के सामने ले गये.
"जानू, देखो मिरर मैं. कैसे लग रहे हैं हम दोनो बाप बेटी?"मैं मिरर मैं देख कर बुरी तरह शर्मा गयी.
"पापा ... आप बड़े वो हैं ..." दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

पापा मिरर के सामने इस तरह खड़े थे के मेरी बॅक साइड मिरर की तरफ थी. मैं ने एक बार फिर अपनी नेक घुमा कर मिरर की तरफ देखा. हम दोनो बाप बेटी बिल्कुल नंगे थे. मैं पापा की गौद मैं बंदरिया की तरह लिपटी हुई थी. पापा ने अपने दोनो हाथों से मेरी गांद को थामा हुआ था. पापा की उंगलियाँ मुझे अपनी गांद के गोश्त के अंदर घुसती हुई दिखाई दे रही थी. मेरी गांद का सुराख पूरी तरह से खुला हुआ था. और उसके नीच पापा का मोटा सख़्त लंड जड़ तक मेरी चूत मैं फँसा हुआ था. मेरी चूत के छेद ने पापा के लंड को रब्बर बॅंड की तरह ग्रिप किया हुआ था.
"कैसी बुरी लग रही हूँ मैं पापा .... "
"नही जानू, तुम बहुत हसीन लग रही हो. बिल्कुल उतनी हसीन जितनी एक लड़की मज़े ले कर चुदवाते हुए लगती है.... इतना हसीन जिसम हे मेरी बेटी का .... बिल्कुल ब्लू बॅंड मार्जरिन की तरह .. देखो मिरर मैं, कैसे पापा ने अपनी बेटी की मोटी ताज़ी गांद को पकड़ा हुआ हे ... और मेरा लंड कैसा लग रहा अपनी जानू बेटी की टाइट चूत मैं ...."पापा ने यह कहते हुए मेरी गांद को ऊपेर उठाया, यहाँ तक के उनका लंड खींचता हुआ टोपी तक बाहर आ गया.

"बहुत टाइट चूत हे मेरी बेटी की. उफ़ मज़ा आ गया जानू .... इस तरह तो 3 या 4 धक्कों मैं हे मेरी मनी निकल जाए गी"यह कहते हुए पापा ने मेरी गांद को नीचे करते हुए अपने लंड को मेरी चूत मैं पुश किया. फिर बाहर निकाला, फिर किया. और फिर बगैर रुके तेज़ी से वो अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करते रहे. पापा पूरी तरह जोश और मस्ती मैं आ गये था. उनके गले से अजीब अजीब आवाज़े निकल रही थी. मुझे अब पता चला के चुद रही हूँ. इसे चोदना कहते हैं. मेरी अपनी हालत खराब हो चुकी थी. मेरे मुँह से भी है हाई की और बिल्ली की तरह घुर्रने की आवाज़ निकल रही थी.

"चोद रहा हूँ अपनी जानू को .... लंड जा रहा तेरी चूत मैं जानू ... चुद मेरे लंड से .... चुद अपने पापा के लौरे से .... मज़ा आ रहा से .... टाइट चूत है मेरी बेटी की .... ""पापा चोदो अपनी बेटी को .... चोदो मुझे ..... फाड़ दो मेरी चूत को ..... उफ़ मरगई पापा ... बोहत सख़्त लंड है आप का ...... उफ़ लंड पेट मैं चला गया मेरे ..... पापा फॅट गई मेरी चूत .... चोदो ..... चोदो ..... उफ़ चुद गई मैं मम्मी. ओ' मम्मी पापा ने चोद दिया मुझे ...... पापा ज़ोर से चोदो .... और ज़ोर से चोदो ..... धक्के लगाओ ज़ोर ज़ोर से ...... मज़ा आ रहा है ..."

अब मेरा जिस्म अकड़ना शुरू हो रहा था. मुझे अपना दिमाग़ घूमता हुआ महसूस हो रहा था. मेरी चूत के सारे मुस्छले अकड़ने लगे थे. और चूत के अंदर पापा का लंड फूलने और पिचकने लगा था."उफ़ जानू मेरी मनी निकल रही तेरी चूत मैं." इस के साथ ही पापा का जिस्म बुरी तरह मुझे गौद मैं लिये झटके मारने लगा. मेरी गांद को पूरा नीचे खींच कर अपने लंड के साथ जमा दिया, और नीचे से अपने पूरी तरह मेरी चूत मैं फँसा दिया.

पापा की गरम गरम मनी की पिचकारिया मुझे अपनी चूत की गहराइयों मैं जाती हुई सॉफ महसूस हो रही थी. इस के साथ ही मैं भी ख़तम हो रही थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.हम दोनो बाप बेटी का जिसम अब ढीला पड़ता जा रहा था. पसीने मैं हम दोनो नहा चुके थे. मेरी चूत मैं बिल्कुल ठंडी पड़ गई थी. पापा का लंड भी ढीला पड़ने लगा था. Newhindisexstory.com मगर अभी तक मेरी चूत मैं ही.पापा इसी तरह मुझे गौद मैं लिये लिये, सोफे पेर बैठ गये, और मैं अपने पापा के सीने के साथ यूँही चिपकी रही. मेरी पसीने मैं भीगी हुई छातियाँ पापा के बालों भरे सीने से पिसी हुई थी. दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

पापा का लंड आख़िर नरम हो कर मेरी चूत से बाहर निकल आया, और इसके साथ ही मेरी चूत से पापा की मनी बह बह कर बाहर आने लगी.सोफा खराब ना हो जाए, इस ख़याल से मैं ने नीचे अपनी चूत पर हाथ रख दिया, और पापा की मनी अपने हाथो मैं ले ले कर अपने पैर ऑर बूब्स पर मलने लगी.पापा और मैं अब थक चुके थे. हम दोनो बाप बेटी बेड पेर जा कर एक दूसरे की बाँहों मैं लिपट कर लेट गाए. मैं पाप के सीने से बरी तरह चिप टी हुई थी, और पापा के होंठों को किस कर रही थी. मेरे टिट्स पापा के सीने से मिले हुए थे.

"कैसा लगा मेरी जानू को?" पापा ने आहिस्ता से मेरे कान से मुँह लगा कर पूछा.
"आप को कैसा लगा पापा?
"जानू, मुझे टॉ बहुत अछा लगा. तुम्हारी अम्मी के बाद आज तुम ने वो मज़ा दिया हे के बता नहीं सकता. बहुत टाइट चूत हे मेरी नूरी की. आज मुझे पता चला के मेरी बेटी का जिस्म कितना सेक्सी हे. जी चाहता के बस अपनी नूरी जानू को चोदता रहूं." यह कहते हुए पापा ने मेरी गाड़ की दोनो गोलाईयों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

मैं ने अपनी एक टाँग पापा के दोनो टाँगों के बीच मैं डाल कर पापा को अपने से और क़रीब कर लिया, के पापा का लंड मेरी चूत के उपर रगर खाने लगा.मैं नंगी थी और पापा भी नंगे थे. हमारे दोनो के नंगे जिस्मों मैं फिर से आग दहकने लगी. मैं तो आज इतनी छोटी सी उमर मैं पहली दफ़ा चुदी थी, इस लिये मुझे बहुत ज़ियादा अब बार बार चुड़वाने की खाविश हो रही थी. मेरा बस नही चल रहा था के मैं पापा के कहूँ के बस वो मुझे चोदते रहाीन.मैं अपनी गांद को आगे की तरफ पुश कर कर के अपनी चूत को पापा के लंड से रगर रही थी. पापा का लंड फिर से तन कर सख़्त हो गया था. दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

"जानू फिर से चोदू तुम्हे?" पापा मेरी हरकतों से शायद समझ गये थे.
"हून …" मैं इस हून के साइवा कुछ और ना बोल सकी और शरमा कर मैं ने अपना मुँह पापा के सीने मे छुपा लिया, और एक हाथ से पापा का सख़्त लंड मुथि मैं जकर लिया. पापा का लंड मेरी मुथि मैं आते ही बुरी तरह से मचलने लगा."मैं अब अपनी प्यारी सी बेटी को पीछे की तरफ से घोरी बना कर चोदूगा" पापा ने यह कहते हुआी मुझे औंधी हो कर गांद ऊपर उठाने को कहा.मैं बेड पेर औंधी हो गई और गाड़ बिल्कुल ऊपर उठा दी. पापा ने पीछे से मेरी गोल गोल गांद को अपने दोनो हाथों मैं थाम लिया और बजाए अपना लंड मेरी चूत मैं डालने के, उन्हो ने अपनी ज़बान से मेरी चूत चाटनी श्रु करदी.पीछे से मेरी चूत चाटने की वजह से मेरा बुरा हाल हो गया और मेरे पूरे जिस्म मैं जैसे करेंट सा दौरने लगा."पापा …. मार गई …. उफ़ पापा …. काइया कर रहे हैं मेरी चूत मैं ….. मार जाऊंगी ….. चोदिए मुझे …… चोदिए पापा …… मेरी छूट को छोदान ….. लंड डालैन अपना मेरी छूट मैं …..!!"

पापा ने आख़िर एक हाथ से मेरी गांद पकरी और दूसरे हाथ से अपने लंड की टोपी मेरी चूत के छेड़ से लगाते हुआी कहा: "नूरी …. डालूं लंड तेरी चूत मैं .. .. .. उफ़ नूरी कितनी चिकनी और गुलाबी चूत हे मेरी बेटी की …." पापा मेरी चूत पेर अपना लंड फेर रहे थे. मेरी चूत के दाने से लंड की टोपी जुब टच होती तो मैं बुरी तरह मज़े मैं काँपने लगती ."छोदिए ना पापा …. डालै ना अपना लंड अपनी बेटी की चूत मैं …… मार जाऊंगी ….. पूरी ताक़त से चोदै मुझे ….. आग लग रही हे मेरी चूत मैं पापा …."

पापा ने फिर एक ही धक्के मैं अपना पूरा लंड मेरी चूत मैं डाल दिया और मेरी गोल गोल गोरी गोरी गांद को पाकर कर अपने लंड को तेज़ी से मेरी चूत के अंदर बाहर करते रहे. पापा के लौरे का एक एक झटका मुझे जन्नत की सैर करवा रहा था. मैं अपनी गांद को पापा के हर झटके पेर पीछे पापा के लंड पेर मार रही थी. पापा ने मेरी गांद पेर से हाथ हटा कर मेरी टिट्स को अपनी मुति मैं कस कर पाकर मेरी चूत को चोदना जारी रखा.
मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी. मैं अपनी आंखें बन्द किये चुदाई का भरपूर मज़ा ले रही थी.

"उफ़ जानू तेरी चूत …. मज़ा आ रहा मुझे अपनी बेटी को चोदने का ….. नूरी चुद मेरे लंड से …. चुद मेरे लंड से ….. नूरी तेरी मया की चूत को चोदु …. उफ़ मेरी बेटी की चिकनी चिकनी टाइट चूत को चोद रहा हूँ."
इधर मेरा भी बुरा हाल था. "पापा चोदिये …. चोदिये …. चोद मुझे …. ज़ोर ज़ोर से …. चोद …. चोदो ….. फार दो मेरी चूत को …. उफ़ काइया करूँ ….. मार गई …. ख़तम होने वाली हून पापा …. छूटने वाली हून …."
मेरी चूत ने पापा के लंड को ग्रिप कर लिया. एक दूं पापा ज़ोर से चीखे. "मनी निकल रही हे मेरी ….. अपनी बेटी की चूत मैं …" एक दूं से मुझे पापा के लंड से मनी का तेज़ गरम गरम फवर अपनी चूत मैं निकलता हस महसूस हुआ. और इधर मैं भी छूटने लगी. पापा और मेरा जिसम साथ साथ झटके मार रहा था.पापा की मनी निकलने से उनका लंड ढीला परने लगा और गहरी गहरी साँसें लेते हुआी पापा मेरे ऊपर मुझे अपने बॉडी के नीचे दबाते हुआी लेट गाए. मेरी साँसाइन भी तेज़ तेज़ चल रही तीन.
"उफ़ … मज़ा … आ गया …. नूरी." हम दोनो कुछ देर योही लेते रहे. फिट सीधे हो कर एक दूसरे की बाहों मैं लिपट कर सो गाए. नींद आने से पहले जो चीज़ मुझे महसूस हुई, वो पापा की मनी थी, जो मेरी चूत से आहिस्ता आहिस्ता बाहर मेरी राणो पेर निकल कर बह रही थी. मैं ने हाथ नीचे ले जा कर पापा की बहती हुई मनी अपनी चूत और राणो पेर मालनी शुरू की, और फिर पता नहीं कब सो गई.

सुबा जुब मेरी आंक खुली तो अछी ख़ासी रोशनी हो चुकी थी. आँख खुली तो देखा के मैं ने पापा का तना हुआ लंड अपने हाथ मैं जाकरा हुआ था. मेरी मुथि मैं से पापा के लंड की टोपी फूल कर पर्पल कलर की हो रही थी और चमक रही थी. ट्रॅन्स्परेंट कलर का पानी पापा के लंड के छेद से निकल रहा था. मैं ने अपनी उंगली से पानी को छुआ टॉ लेसदार पानी था, चिकना चिकना.पापा भी उठ गाए और उठे ही मुझे अपने जिसम से चिपेट कर सुबा जुब मेरी आंक खुली तो अछी ख़ासी रोशनी हो चुकी थी. आँख खुली तो देखा के मैं ने पापा का तना हुआ लंड अपने हाथ मैं जाकरा हुआ था. मेरी मुथि मैं से पापा के लंड की टोपी फूल कर पर्पल कलर की हो रही थी और चमक रही थी. ट्रॅन्स्परेंट कलर का पानी पापा के लंड के छेद से निकल रहा था. मैं ने अपनी उंगली से पानी को छुआ टॉ लेसदार पानी था, चिकना चिकना.पापा भी उठ गाए और उठे ही मुझे अपने जिसम से चिपेट कर किस करने लगे.
"पापा मुझे पी आ रही हे"
"मुझे भी आ रही हे जानू"
चलो आओ मेरे साथ बाथरूम मैं.
पापा से चुड़वाने वाली बात और थी. मगर यह सोच कर के मैं पापा के साथ बाथरूम मैं जा कर कैसे पापा के सामने कमोड पेर बैठ कर पी करूँगी, और पापा मेरे सामने पी करेंगे, मुझे बहुत शरम आई.
"नहीं पापा, मुझे आप के सामने पी करते शरम आए गी"
"जानू, जुब तुम अपने पापा से चुदवा चुकी हो, हम दोनो पूरी रात से नूँगे एक दूसरे के सामने हैं, टॉ पी करने मैं काइया है …. आओ … चलो मेरे साथ …"

पापा यह कहते हुए मुझे बेड से उतार कर मेरी कमर मैं हाथ डाल कर मुझे बाथरूम मैं ले गए.

बातरूम के अंदर जाते ही पापा ने मुझे अपने से लिपटा लिया. बेड पेर तो मुझे अपनी हाइट का अंदाज़ा नही हुआ , मगर खरे हुए हालत मैं पता चला के मेरा सिर पापा के सीने तक ही पहुच पाया था. अभी सिर्फ़ मैं 13 साल की थी. हां थोरी सी मोटी थी. गोरा रंग था मेरा, जिस्म मेरा भरा भरा सा था और गांद मेरी खास तौर से बहुत मोटी और बाहर की तरफ निकली हुई थी. यह सब मैं इस लिये बता रहीं हूँ के मुझे पापा से लिपट कर अपने सरपे का एहसास हुआ. खरे होने की वजह से पापा का मुरझाया हुआ लंड मेरी टिट्स को छू रहा था.

पापा मुझे झुक कर प्यार कर रहे थे और मेरे सारे जिसम और मेरी गांद और चूत पेर हाथ फेर रहे थे.
"उफ़ जानू कितना प्यारा और सेक्सी जिसम हे मेरी बेटी का…. क्या करूँ तेरे साथ जानू ….. बिल्कुल मुलतानी चिकनी मिट्टी की तरह जिसम हे तेरा जानू ….. "
इस के साथ ही पापा ने जब मेरी चूत के दाने (क्लिट) पेर उंगली फेरी तो मेरे सारे जिसम मैं सनसनी दौर गई. पेशाब मुझे भोथ ज़ोर से आ रहा था. पिछळी शाम से मैं ने पेशाब नही काइया था.

"पापा मुझे बहुत ज़ोर से पी आ रही हे, निकल जाई गी"मगर पापा ने मेरी एक ना सुनी और बाथरूम के टाइल वाले फरश पेर लेट कर उन्हो ने पाकर कर मुझे अपने मुँह पेर बिठा लिया.मेरी हालत यह थी के एक तरफ मुझे फिर से चुड़वाने की शडीड खाविश हो रही थी, और दूसरी तरफ मुझे बरी ज़ोर का पेशाब आ रहा था, और तीसरी तरफ मैं स्क्वाटिंग पोज़िशन मैं पापा के मुँह के साथ अपनी चूत लगाए बैठी थी.
"पापा, प्लीज़ मुझे पी करने दें पहले …. निकल जाए गी नहीं तो ….."

"तो करो ने पी" पापा एक लम्हे के लिये मेरी चूत से मुँह हटा कर बोले. पापा की ज़बान मेरी चूत के पेशाब वाली जगह को चाट रही थी.मैं हैरान रह गई. मुझे अपने कानो पेर यक़ीन नही आ रहा था के पापा ऐसा भी सोच सकते हैं."ची पापा …. आप के मुँह मैं चला जाए गा मेरी पी … पापा आप बोहट गंदे हैं .."
"जानू करो मेरे मुँह मैं … अपनी बेटी का पेशाब पीऊँगा … कर मेरी जान …"
पापा यह कहने के बाद मेरी गांद को ज़ोर से पाकर कर मेरी चूत पूरी की पूरी अपने मुँह मैं भर ली, के मैं अब कुत्छ भी नहीं कर सकती थी, सिवाए पापा के मुँह मैं पी करने के. पी को रोकना अब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो रहा था. ऐसा लगता था के अगर मैं ने अब और एक सेकेंड भी देर की तो मेरा ब्लॅडर फॅट जाए गा.

फिर मेरी पेशाब के सुराख से पहली गरम गरम तेज़ धार मेरे पापा के मुँह मैं निकली. एक धार मार कर मेरा पेशाब रुक गया. मुझे लगा के पापा का मुँह मेरी एक धार से पूरा भर गया होगा. मेरी चूत चुनके पापा के मुँह मैं पूरी घुसी हुई थी, लहज़ा मुझे पापा के मुँह की मूव्मेंट से पता चल गया के पापा ने अपने मुँह मैं भरा हुआ मेरा यूरिन पी लिया हे."जानू ….. अब खरी हो कर अपने पापा पेर पेशाब करो … लेकिन आहिस्ता आहिस्ता …. जितना भी रुक रुक कर कर सकती हो … मेरे मुँह पेर …. मेरी बॉडी पेर और पापा के लंड पेर …"

मैं पापा के मुँह पेर से उठ कर खरी हो गई. मैं ने अपनी गांद बिल्कुल आगे की तरफ करते हुआी, अपनी चूत को अपनी उंगलिओन से चीरते हुआी पेशाब की एक सीधी धार पापा के चेहरे पेर मारी. पापा मुँह को पूरा खले हुआी थे. मेरे गोलडेन कलर की गरम पेशाब की फुल तेज़ धार पापा के चेहरे पेर पार्टी हुई उनके मुँह मैं गई. मुझे पापा के हलाक़ से गर्र्र्र…गर्र्र्र…ग.र.र.र.र.र की आवाज़ आई, और पापा का खुला हुआ मुँह मेरे पेशाब से पूरा भर गया, बुलके उनके होंटो के किनारों से मेरा पेशाब झाग की शकल मैं बह रहा था. पापा के मुँह मैं अपनी पी देख कर मेरी जो मस्ती से हालत हो रही थी वो मैं बता नहीं सकती. जी चाहता था के अपने पापा के मुँह से अपना मुँह लगा कर उन्हे खूब प्यार करूँ और पापा के साथ अपनी पी शेर करूँ.

मेरी पी अब रुक नही रही थी. मेरी चूत से मेरी गोलडेन पी अब पापा के बॉडी पेर गिर रही थी. फिर पीछे हट तय हुआी मैं ने पापा के हाफ हार्ड लंड पे पेशाब करना श्रु काइया. इसी तरह मैं ने आगे पीछे होते हुआी पापा को पूरा का पूरा अपने यूरिन से नहला दिया. बात रूम का पूरा वाइल टाइल्ड फ्लोर मेरे यूरिन से गोलडेन हो रहा था. पापा ने फिर मेरा हाथ पाकर कर मुझे अपने ऊपेर गिरा लिया. मेरा पेशाब अब भी मेरी चूत से निकल रहा था. इतना ज़ियादा पेशाब मैं कर रही थी के मैं हैरान रह गई. पापा के जिसम से लिपटने की वजह से मैं भी अपने यूरिन मैं गीली हो गई. पापा ने अपने मज़बूत बाज़ू मैं मुझे जाकरा हुआ था और मेरे मुँह की चूमियँ ले रहे थे. मुझे Newhindisexstory.com अपने पी की तेज़ स्मेल अपने और पापा के जिसम से आ रही थी.
"अब खुश पापा? मज़ा आया आपको?" मैं ने पापा से पूछा.
"उफ़ जानू इतना मज़ा आया के मैं बता नहीं सकता! मेरी बेटी को मज़ा आया?"
"पापा मुझे पता नहीं था इस तरह करने मैं इतना मज़ा आता है. भोथ ज़ोर से पी आ रही थी, इस लिये मज़ा भी भोथ आया, बस अब चोदो मुझे…"
यह कहते हुआी मैं पापा के लंड पेर अपनी चिकनी हेरलेस चूत को रगार्ने लगी. मेरे चूत रगार्ने की वजह से पापा का लंड पूरा तन कर सख़्त हो गया, और मेरे पायट मैं घुसने लगा.

"जानू अभी मज़ा तुम ने और मैं ने पूरा कहा लिया हे … मुझे भी तो पी करनी हे. मैं ने भी कल आफ्टरनून के बाद से पी नहीं की … "यह सुन कर के अब पापा पी कराईं गे और वो भी मेरा ऊपेर, मैं लिज़्ज़त और मस्ती मैं पूरी भर गई.पापा ने मुझे बात टब के अंदर बैयतने को कहा. फिर उन्हो ने बात टब की ड्रेन को रब्बर प्लग से बूँद कर दिया. मैं समझ गई के पापा अपना यूरिन बात टब मैं से ड्रेन आउट नही करना चाहते थे.मैं बात टब मैं अपनी नीस पेर खरी हो गई, और पापा ने मेरे सामने खरी हो कर अपना लंड की टोपी मेरे मुँह मैं डाल दी.
"जानू, अब पापा की पी निकलने वाली हे …. तय्यार हो?"
मैं ने इशारे से सिर हिला कर हन कहा. रात से मैं जिस सिचुयेशन से गुज़र रही थी, ये मेरी लाइफ की सूब से थ्रिलिंग सिचुयेशन थी. मुझे कभी इन सूब बातों का तस्सावार भी नही आया था, और ऊपेर से यह यूरिन वाली सिचुयेशन ने तो मुझे मस्ती की इंतिहा बुलंडीओन पेर फॉनचा दिया था.अचानक पापा के लौरे से पेशाब की गरम गरम नमकीन धार मेरे मुँह मैं निकली, और मेरा मुँह भर गया. मैं बे इकतियार पापा का पेशाब पीने लगी. धार इतनी तेज़ी से निकल रही थी के पापा का पेशाब मेरे मुँह के किनारों से निकल कर मेरे जिसम पेर बह रहा था. दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर पापा ने लंड मेरे मुँह से बाहर निकाला और मेरे हेर्स, फेस और टिट्स पेर अपने गोलडेन, गरम पेशाब की तेज़ धार मरते रहे. मेरा बस नही चल रहा था के मैं काइया करूँ. मैं अपने दोनो पाम्स ज़ोर कर पापा का पेशाब उसमे भारती और अपने फेस तो धोती और अपनी छातियों पेर डालती रही.
जुब मैं मज़े और मस्ती की हाइट पेर थी तो पापा का पेशाब एक दूं रुक गया.
"पापा काइया हुआ?"
"अभी तो श्रु हुआ हे जानू" पापा ने यह कह कर मुझे टब मैं लेटने को कहा. मैं चिट हो लेट गई और अपनी तांगे खोल दी.

पापा ने मेरे पावं के तरफ खरे हो कर अपना लंड पाकर के मेरी पूरी बॉडी पेर अपने पेशाब की गोलडेन और गरम गरम नमकीन धार मारनी श्रु करदी. मैं सिर के बलों से ले कर फीट तक पापा के गोलडेन पेशाब मैं डूब गई. पापा के पेशाब की धार मेरी आँखों पेर, होंतों पेर, मुँह मैं, छातियों पेर, मेरे पायट और चूत पेर गिर रही थी. मैं बुरी तरह से पापा का पेशाब अपने पूरे जिसम पेर माल रही थी और अपनी चूत को पापा के पी से नहला रही थी.

पापा के गरम गरम पेशाब की तेज़ धार मेरी बॉडी पेर अजीब सा मज़ा दे रही थी. बात टब का होल बूँद होने की वजह से, बात टब मैं पापा का गोलडेन यूरिन भरा हुआ था, और मैं उस यूरिन मैं जैसे स्विम कर रही थी. पापा का जुब पेशाब ख़तम हुआ तो वो बात टब मैं मेरे फीट के पास बैठ गाए.
"पापा अब चोदोना मुझे … मुझ से बर्दाश्त नही होता ….. मैं मार जाऊंगी पापा ….. अपना लंड डालो मेरी चूत मैं …" . मेरी हालत चुड़वाने की खाविश की वजह से बहुत बुरी हो रही थी.

बाथ टब की स्पेस टाइट हनी की वजह से पापा को मेरी टांगें उठा कर मुझे चोदने मैं मुश्किल हो रही थी. पापा ने मुझे उल्टी हो जाने को कहा. मैं औंधी हो गई और अपनी गांद पूरी ऊपर उठा दी, ताकि पापा को अपना लंड मेरी चूत मैं डालने मैं मुश्किल ना हो. मगर औंधी होने मैं मेरा चेहरा आधे से ज़ियादा पापा के यूरिन मैं डूबा हुआ था. जनरली, यूरिन की स्मेल अछी नही लगती, मगर उस वक़्त मुझे अपने पापा के पेशाब की स्मेल बोहट अछी लग रही थी. पापा का गोलडेन पेशाब मेरी नोस और मेरे मुँह मैं जा रहा था.
पापा ने झुक कर अपना लंड मेरी चूत मैं डालने की कोशिश की, लेकिन जगह तुंग हो ने की वजह से उन्हे मुश्किल हो रही थी.
"जानू, बाथ टब से बाहर जा कर तुम्हे चोदना परे गा" पापा ने कहा.
"नहीं पापा यहीं चोदो … आप के पेशाब मैं लिपट कर चुड़वऊंगी"

पापा ने मुझे उठने को कहा, और खुद बाथ टब के फ़राश पेर हेड रेस्ट के साथ अपनी कमर टीका कर और अपनी टांगायन लंबी कर के बैठ गये. पापा का लॉरा फुल तना हुआ खरा था और मेरी पी मैं भीगा हुआ था. मैं पापा की तरफ मुँह कर के पापा के लंड पेर इस तरह बैठी के पापा के लंड की 3 इंच मोटी पर्पल टोपी मेरी चूत के छेद से लगी हुई थी. मैं ने नीचे हाथ डाल कर पापा के लंड को अपनी मुथि मे जकर लिया और लौरे को अपनी खुली हुई चूत के बीच मैं ओपपेर से नीचे की तरफ फेरने लगी. जुब मैं पापा के लंड की टोपी को अपनी क्लिट पेर फेरती तो मेरे पूरे जिसम मैं गुदगुदी हों ने लगती. मैं फुल मस्त हो चुकी थी. मैं इन सूब बातों को भूल चुकी थी के मैं अपने सगे बाप के साथ ये कर रही हूँ.
अब पापा से भी बर्दाश्त नही हो रहा था.
"जानू जल्दी से मेरा लंड अपनी चूत के अंदर ले कर मुझे चोदो, वरना मेरी मनी बाहर ही निकल जाएगी".
मैं ने पापा का लंड अपनी चूत के होल से लगाते हुआ पापा के लौरे पेर बैठती चली गई. पापा का लंड मेरी टाइट चूत को चीरता हुआ अंदर पूरा चला गया. इतना सख़्त पत्थर की तरह लंड था पापा का के मुझे ऐसे लगा के पापा का लंड मेरे पायट मैं से होता हुआ मेरे मुँह से बाहर आ जाए गा.
मेरी छोटी सी चूत मैं पापा का लंड पूरा फँस गया था, यहाँ टुक के मैं अपनी गांद को ऊपेर नीचे कर रही थी के पापा का लंड भी इसके साथ ही मेरी चूत मैं अंदर बाहर होता रहे, लेकिन लंड इतनी बुरी तरह मेरी नन्ही सी टाइट चूत मैं फँस चुका था के लंड अंदर बाहर भी नही हो रहा था.
"पापा भोथ सख़्त और मोटा लंड हे आपका … कैसे चोदु आप को"

पापा को भी मुश्किल हो रही थी मुझे चोदने मैं, इस लिये के वो नीचे से कुत्छ नही कर सकते थे. आख़िर उन्हो ने मेरी गांद के नीचे हाथ डाल कर और मुझे अपनी गोद मैं भरते हुआी उठ कर खरी हो गाए. मैं पापा के जिसम के साथ लिपट गईं. पापा इसी हालत मैं ले कर मुझे टब से बाहर आए, और फिर मुहज़े बाथरूम के फ्लोर पेर लिटा कर मेरी टाँग उठा कर मुझे चोदने लगे.

"उफ़ मेरी बेटी की चूत वाक़ई बोहट टाइट हे …. बोहट मूसखिल हो रही हे अपनी जानू को चोदने मे"पापा अपना लंड जुब मेरी चूत मैं अंदर बाहर करने लगते तो उसके साथ ही मेरी चूत की अंदर की स्किन भी बाहर निकल आती. एक दफ़ा जो पापा ने ज़ोर लगा कर मेरी नाज़ुक चूत से अपने लंड को खींच कर बाहर निकाला तो झटके से पापा खुद भी पीछे चले गाए, और मेरी चूत मैं से बोहट ज़ोर की ऐसी आवाज़ आई जैसे के बॉटल का कॉर्क निकलने से या पेप्सी के बॉटल का ढक्कन खोलने से आती हे.

पापा ने हाथ बढ़ा कर आख़िर कोकनट आयिल की बॉटल उठाई और मेरी चूत और अपने लंड पेर खूब सारा आयिल माला. फिर जो उन्हो ने मेरी चूत से अपने लंड की टोपी को लगाया तो एक ही झटके मैं पापा का लंड फिसलता हुआ पूरा का पूरा मेरी चूत मैं चला गया. अब पापा आराम से मज़े ले ले कर मुझे छोड़ने लगे. छोड़ते हुआी कभी मेरी एप्रिकॉट जैसी टिट्स को पाकर कर चूस्टे, काहबी मुँह मैं अपनी ज़बान डाल कर मुझे प्यार करते. दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

"उफ़ जानू मज़ा आ रहा तुझे छोड़े मैं … चोद रहा हूँ तुझे जानू … चुद मेरे लंड से …. पूरा लंड गया मेरी बेटी की चूत मैं ….. चोद रहा हूँ अपनी बेटी को …..उफ़ तेरी टाइट चूत जानू …"
"पापा चोदो मुझे …. छोड़ो … और ज़ोर से चोदो अपनी बेटी को ….. मज़ा आ रहा हे पापा …. उफ़ पापा कितना मोटा और लंबा लंड हे मेरे पापा का …. उफ़ मार गई … पापा मेरे पेट मैं चला गया लंड आप का."


एक दम से पापा के धक्कों मैं तेज़ी आगाई. उन्हो ने मेरी गांड के नीचे हाथ डाल कर इतनी शिद्दत से धक्के मारनें शुरू किये की मस्ती से मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं, और मैं चूत पानी छोरने लगी. उसके साथ ही पापा ने भी चीकथे हुआी मेरी चूत की गहराइयों मैं अपनी गरम गरम मनी की धार चोर दी. मेरी चूत पापा की मनी से लाबा लूब भर गई. पापा मेरे ऊपेर गिर परे. हम दोनो बाप बेटी जैसे नशे मैं टन हो चुके थे. हम दोनो के सर बुरी तरह घूम रहे थे. हम दोनो गहरी गहरी साँसें ले रहे थे, जैसे 5 किलोमीटर की रेस लगा कर आ रहे हों.

पहली ही दफ़ा मैं हम दोनो बाप बेटी की चुदाई का इतना मज़ा ले चुके थे के शाएेद सुहाग रात को हज़्बेंड और वाइफ भी नही लेते होंगे. हम दोनो इतना थक चुके थे के अब और हिम्मत नही थी. जितना मैं पहली दफ़ा मैं छुड़वा चुकी थी और मज़े ले चुकी थी, उसके नशे मैं सिर से पाओं तक डूबी रहना चाहती थी.

कोई 15 मिनिट्स तक अपनी अपनी साँस ठीक करने के बाद हम दोनो उठे और पापा ने बाथ टब का शावर खोल दिया. दुनिया मैं कितने बाप बेटी ऐसे होंगे जो एक साथ नंगे बाथ टब मैं नहाए हों? ठंडा ठंडा पानी जिसम से लगते ही मज़ा आ गया. पापा ने मेरे सारे जिसम पेर लक्स सोप लगा कर और मेरे बालों मैं सुनसिल्क शॅमपू अछी तारा लगा कर और मेरे पूरे जिसम हेड से ले कर फीट तक मल मल के मुझे नहलाया. मैं पापा की तरफ बॅक कर के उनके जिसम के साथ जूरी हुई थी. पापा ने मेरी नेक के बाद जब मेरी एप्रिकॉट जैसे टिट्स को सोप लगा कर हाथों से मलना श्रु काइया तो मेरी टिट्स से ले कर मेरी चूत तक टिकलिंग शुरू हो गई.

फिर पापा का हाथ जब अपनी छोटी सी बेटी की हेरलेस चूत पेर पहुँचा तो मैं एक बार मस्त होने लगी. सोप की वजह से चूत मेरी और चिकनी हो गई थी, ऊपेर से पापा की उंगलियाँ जब मेरे चूत के दाने को मसाल्तीं तो मैं बे इक्तियार गांद को आगे पीछे करने लगती.पापा के दोनो हाथ मेरी चूत से होते हुआी पीछे मेरी गोरी और मोटी मोटी गांद पेर सोप मलने लगे. पापा ने अपना हाथ मेरी गोरी और वॉटर मेलन जैसी गांद पेर फेरना शुरू काइया, और फिर अपने हाथ से मेरी गांद के ग्लोब्स के बीच मैं सोप के सड्स मलने लगे.

मैं तो अभी पूरी तरह जवान भी नहीं हुई थी, और ना मुझे अभी तक पीरियड्स श्रु हुआी थे. कच्ची जवानी मैं जब लर्की पहली दफ़ा चुड़वा लेती है तो उसका बस नहीं चलता के वो हर पल चुड़वाए. और यहाँ तो परदह ही कोई नही था. छुड़वाने वाली बेटी थी तो छोड़ने वाला मेरे पापा थे. और पापा मैं पूरा ट्रस्ट कर सकती थी, क्यूँ क पापा से मुझे मम्मी के वक़्त से ही बोहट प्यार था. मगर वो पहले वाला प्यार रियल बाप बेटी वाला था. अब मेरे प्यार ने एक नया टर्न ले लिया था और मैं अब सेक्सुअल्ली पापा को प्यार करने लगी थी. पापा पेर मेरा ट्रस्ट और भी ज़ियादा हो गया था. मैं शाएेद किसी अजनबी लरके से कभी इतना नही खुल सकती थी. अगर किसी लरके से प्यार हो भी जाता, तो भी मैं उसके साथ इतनी जल्दी सेक्स अफेर मैं नही जाती.

पापा के साथ पिछली रात से मेरा सेक्स अफेर शुरू हुआ. पापा ने जो भी मेरे साथ काइया, मेरे एग्री होने पर काइया. मेरी बॉडी को अब्यूस नही काइया. मेरे जिसम के एक एक ऑर्गन को बोहट प्यार से हॅंडल काइया. यहाँ तक के मेरी चूत को भी आराम से और मुझ से पूछ पूछ कर छोड़ा, ताकि मुझे दर्द ना हो, तकलीफ़ ना हो. यह सब इस लिये हुआ के पापा भी मुझे बोहट प्यार करते थे (और करते हैं). मैं हमेशा पापा से बोहट क्लोज़ रही हूँ. और वो बाप बेटी के अनमोल प्यार का रीलेशन था. और एक ही रात मैं इतनी सी आगे मैं, मैं पापा की औरत बुन चुकी थी.
यह सूब सोचते सोचते हम दोनो बाप बेटी बाथ ले चुके थे के अचानक मुझे पापा का तना हुआ सख़्त लंड पीछे से अपनी गांद के बीच मैं घुसता हुआ लगा. पापा का 7 इंच के लंड का हेड मेरी गांद के ग्लोब्स के बीच मैं से होता हुआ मेरी चूत की तरफ से बाहर निकल आया. पापा ने ऐसा जान के नहीं काइया था. असल मैं पापा शवर को बूँद करने के लिये जब आगे हुआी तो आप ही आप ऐसा होगआया. मैं ने झट से पापा के लौरे की टॉप को अपनी मुथि मैं पाकर लिया और अपनी मुथि को लंड पे आगे पीछे करने लगी.
"जानू काइया फिर चुदना चाहती हो" पापा ने पूछा.
"नही पापा … बोहट ज़ियादा हम दोनो थक नही गये … हन बेड पे आप के साथ सोने से पहले आपके इस प्यारे से लंड को चूस कर इसकी गरम गरम मनी मुँह मैं निकल कर पीऊँगी .. ठीक हे ना पापा?"
बाथ लेने के बाद पापा मुझे अपनी गौड़ मैं उठा कर बेड पेर ले गाए. मैं नंगी पापा की गौड़ मैं अजीब सी लग रही थी. छोटी सी नन्नी बेबी की तरह मैं मैं पापा की बाहों मैं थी.
बेड पेर पापा की Newhindisexstory.com तरफ करवट ले कर लेट कर मैं ने अपनी मुथि मैं पापा का खरा हुआ सख़्त लंड पाकर लिया और आहिस्ता आहिस्ता पापा के लंड को सहला ती रही. मुझे अपने पापा पेर बे हुड प्यार आ रहा था, जिन्होने एक ही रात मैं अपनी बेटी को काली से फूल बना दिया था. मैं लर्की और लरके के सेक्स रिलेशन्स (जिन्सी रिश्ते) से ना आशना थी. पापा के साथ एक ही रात मैं, मैं सूब कुछ सीख गई, समझ गई और वो भी भरपूर मज़े के साथ. दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

पापा का लंड पाकरे पाकरे मैं पापा के सीने के ऊपर हो कर अपने पापा को किस करने लगी. पापा आँखें बूँद किए लेते थे. मैं ने पापा के लिप्स अपनी लिप्स मिला कर खूब किस करने लगी. फिर पापा की आँखो, गालों और नेक पेर किस करती रही. पापा ने अपने एक हाथ बघल के नीचे डाल कर मुहज़े अपने साथ ज़ोर से चिमटा लिया. किस्सिंग करते करते मैं ने पापा से पूछा:
"पापा मैं कैसी लगती हूँ आप को?"
"बहुत पियरी, बहुत खूबसूरत" पापा ने जवाब दिया.

"आप कितना प्यार करते हैं मुझसे, पापा?"
"मेरी बेटी बहुत ही प्यारी हे और मैं अपनी बेटी से बहुत ज़ियादा प्यार कर्ता हूँ"
"पापा आप अब मुझे बेटी वाला प्यार ज़ियादा कराईं गे, या ये सेक्स वाला?"
"यह सूब तुम क्यूँ पूच रही हो जानू"
"बताएँ ना पापा…"

"मेरे और तुम्हारे डर्मायाण असल रिश्ता तो बाप बेटी का ही हे, जिस के नाते मैं अपनी बेटी को जान से भी ज़ियादा प्यार करता हूँ" पापा कहते जा रहे थे .. "तुम मेरी ज़िंदगी हो बेटी, बोहट ही प्यारी, और इतनो हसीन और मासूम के बता नही सकता. बाप बेटी होने की वजह से हमारे बीच जो कुत्छ भी हुआ, वो घालत हुआ. गुनाह हुआ. लेकिन जो कुछ भी सेक्षुयली हमारे बीच हुआ, वो सेक्स की भूक की वजह से हुआ. इंसान कमज़ोर होता है. मैं एक साल से सेक्स नही कर सका था. सेक्स की शिद्दत और डिमॅंड मेरे जिसम के अंदर आग लगा रही थी. मैं सेकेंड मॅरेज कर सकता था, मगर इस लिये नही काइया के उस की वजह से मेरी बेटी की लाइफ पेर बुरा असर होता." पापा तोरा साँस लेने को रुके, फिर कहने लगे ..

"बेटी जो कुछ भी हमारे बीच हुआ, वो बिल्कुल अचानक और आक्सिडेंट्ली हो गया. ना मैं नंगा हो के अपने लंड की मुथि लगा रहा होता, ना तुम डर कर अचानक पापा के बेडरूम मैं एंटर होतीं, ना मुझे इस हालत मैं देख कर तुम्हारी जज़्बात भरकते. खैर अब तो जो होना था वो हो गया … मैं अपनी जानू को बेटी और सेक्स लवर दोनो तरह प्यार करता हूँ. आस आ सेक्स लवर, तुम बे हुड मज़ेदार चीज़ हो. मेरी बेटी का जिसम बिल्कुल बटर जैसा चिकना और सॉफ्ट हे. तुम से ज़ियादा मज़ा मुझे छोड़ने का कभी नही आया – तुम्हारी मम्मी के साथ भी नही."

"पापा अब आप ऐसे ही करते रहें गे ना मेरे साथ? मैं आप से प्रॉमिस करती हूँ के कभी भी किसी को मेरे आप के इस रीलेशन के बारे मैं नही बताऊँगी. आप को एक आक्ची बेटी का प्यार भी दूँगी, और एक सेक्स-लविंग वाइफ का प्यार भी दूँगी." मैं कहती गई --- "पापा जब आप का दिल करे, मुझे छोदान. और जिस तरह भी आप का दिल करे, आप मुझे छोदान. मेरा पूरा जिसम आप के लिये हे पापा. मेरे मुँह मैं लंड डाल कर चोदे, या मेरी चूत को चोदे, या मेरे जिसम से खेलें. मैं आपको पूरा एंजाय करावाऊंगी."

यह कहते हुआी मैं ने पापा का लंड ज़ोर से अपनी मुथि मे भींच लिया. पापा की सिसकारी निकल गई. पापा का लॉरा काउ की नुल्ली की तरह सख़्त हो रहा था.
"पापा, बोहट सख़्त और मोटा लंड हे आप का, तभी तो मेरी चूत मैं जा कर फँस गया था. मैं तो दर गई थी के अब कभी बाहर निकले गा ही नही, और हमे इसी हालत मैं डॉक्टर के पास जाना परे गा."
पापा मेरी बात सुन कर हंस परे.
"पापा चूसूं आप का लंड?"

"जानू, पापा का लंड तुम्हारे हाथ मैं है, जो जी चाहे करो!"पापा बिल्कु सीधे लेते हुआी थे और उनका लंड बिल्कुल स्ट्रेट सीलिंग की तरफ मुँह किये तना हुआ खरा था. मेरा दिल चाहा के पापा के इतने हसीन लंड पे, के जिस की पर्पल टोपी से चिकना चिकना पानी निकल रहा था, मैं अपनी चूत रख के बैठ जौन. लेकिन टाइयर्डनेस की वजह से हिम्मत नही हो रही थी. मैं ने लेते ही लेते पापा के ऊपेर आ कर अपनी टांगायन पापा के मुँह की तरफ करते हुआी पापा के लंड की टोपी को अपने मुँह मैं ले कर चूसना शुरू कर दिया. पापा के लंड का चिकना चिकना ट्रॅन्स्परेंट पानी मेरे मुँह के अंदर टपकने लगा.

पापा ने भी मेरी गांद को पाकर कर मेरी चूत मैं उंगली करनी श्रु करदी, और साथ ही साथ मेरी गांद पेर भी हाथ फेरते रहे. मुझे मस्ती छरहने लगी थी. लेकिन इस से पहले के मैं कुछ चोदने के बारे मैं सोचती, पापा एक दूं अपनी हिप्स को ऊपेर उठा कर लंड मेरे मुँह मैं देने लगे, और फ्यू सेकेंड्स मैं ही पापा के लंड से गरम गरम क्रीमिन जैसी टेस्टी मनी मेरे मुँह मैं जेट की तरह निकलने लगी. मैं जल्दी जल्दी अपने पापा की सारी मनी पीटी गई. एक ड्रॉप भी मैं ने बाहर नही निकलने दिया. पापा अपनी हिप्स को उठा उठा कर अपना लंड मेरे मुँह मैं डाल रहे थे.
पापा की मनी (स्पर्म) पी कर मैं फिर पापा के चिकने लंड के ऊपर ही सिर रख कर सो गई.
तो दोस्तो अब जान ही गये होगे आप सब की हम बाप बेटी का जब भी चुदाई का मन करता
हमजी भरकर चुदाई करते हैं कैसी लगी हम दोनो बाप बेटी की चुदाई कहानी ,अगर तुम बाप बेटी की सेक्स कहानी पसंद करता है तो कृपया साझा करें,अगर तुम मेरी चुदाई करना चाहते हैं तो उसे add now Facebook.com/SimranSharma

जावन साली की चुदाई कहानी

 दोस्तों  आज जो जीजा और साली की चुदाई कहानियां बताने जा रहा हू वो मेरी  साली की चुदाई की हैं। दोस्तों में एक साफ सुथरी चुदाई पर यकीन करता हूँ। चूत चाटने से मुझे बहुत घिन आती है। फिर चूत चाटने के अलावा में चुदाई के सभी तरीके प्रयोग करता हूँ। दोस्तों यह कहानी आज से लगभग 4 साल पहले की है। वो नवम्बर का महीना था और ठंड भी पड़ना शुरू हो गई थी और मेरी पत्नी प्रॅगनेंट थी उसका सातवां महीना चल रहा था। फिर मेरी पत्नी ज़्यादा काम नहीं कर पाती थी। तभी मैंने उसकी मदद के लिये अपनी साली को बुला लिया। दोस्तों मेरी साली का नाम कामिनी है वो बहुत सुंदर और सेक्सी लड़की है उसकी उम्र 22 साल की है और चूचियाँ 32″ और कमर 28″ गांड 30″ के आसपास है और वो मुझसे बहुत मज़ाक करती है। फिर मैंने शुरू शुरू में कोई खास ध्यान नहीं दिया लेकिन बहुत दिन से चुदाई नहीं करने के कारण मुझे बहुत अजीब सा लगता था। फिर रात में जब लंड खड़ा होता तो में बाथरूम में जाकर साली का नाम लेकर मुठ मार लेता था।
फिर मेरा मन अब साली को चोदने का करता था लेकिन डर लगता था कि अगर उसने विरोध किया और मेरी पत्नी को पता चल गया तो मेरा हंसता खेलता परिवार उजड़ जाएगा। लेकिन चुदाई करने के लिए कुछ तो पहल करनी ही थी। फिर इसलिए एक दिन मौका देखकर जब मेरी पत्नी आँगन में धूप सेक रही थी और रूम में साली अकेली थी। तभी मैंने पीछे से हाथ लगाया और उसकी कमर पर अपना एक हाथ फैरने लगा। तभी वो अचानक से चौंक गई (निऊहिंदीसेक्सस्टोरी.कॉम) और कहने लगी कि आप यह क्या कर रहे हो? फिर मैंने उसे कहा कि बस तुम्हे छूकर देख रहा हूँ कि तुम्हारे अंदर कितना करंट है। तभी वो एक शैतानी हंसी हंस पड़ी। फिर में समझ चुका था कि हंसी तो फंसी लेकिन शुरू शुरू में तो उसने बहुत नाटक किया लेकिन जब में उसे रोज मौका देखकर चूमने लगा।
अब उसने विरोध करना छोड़ दिया था और शायद उसे मज़ा आता था। लेकिन चुम्मा लेने से लंड की प्यास नहीं बुझती है फिर यही हाल मेरे साथ भी था। फिर मेरी साली अपनी बहन यानी की मेरी पत्नी के साथ ही सोती थी और फिर में उसके पलंग के पास में चौकी पर सोता था.. पत्नी मेरी तरफ मुहं करके और साली दूसरी तरफ सोती थी www.newhindisexstory.com और ऐसे में कुछ भी करना बहुत मुश्किल था। फिर एक दिन सुबह उठकर जब मेरी पत्नी बाथरूम गई थी तभी मैंने मौका देखकर थोड़ी हिम्मत जुटाई और अपनी चौकी से उठकर पलंग पर चला गया और साली के पास में लेट गया लेकिन शायद वो नींद में थी इसलिए उसे पता नहीं चला। फिर मेरे पास समय कम और एक बहुत मौका अच्छा था। तभी मैंने साली की चूचियों पर हाथ रख दिया और फिर उसे धीरे धीरे दबाने लगा.. इससे उसकी नींद अचानक खुल गई और फिर मेरी डर के मारे बहुत हालत खराब हो गई.. मुझे ऊपर से नीचे तक पसीना छूट गया। लेकिन उसने केवल मेरा हाथ पकड़ा था और वो कुछ बोली नहीं। तभी इससे मेरी हिम्मत और बड़ गई और फिर मैंने अपना हाथ छुड़ाकर उसकी (निऊहिंदीसेक्सस्टोरी.कॉम) चूचियों पर रख दिया और फिर बड़े आराम से उन्हें दबाने लगा लेकिन कुछ देर बाद मुझे लगा कि मेरी पत्नी बाथरूम से वापस आ गई है। तभी में तुरंत जल्दी से अपने बिस्तर पर आ गया। फिर करीब एक सप्ताह तक रोज मैंने ऐसा ही किया फिर मेरी प्यास रोज और बड़ती ही जा रही थी।

फिर करीब एक सप्ताह के बाद सुबह रोज की तरह जब मेरी पत्नी बाथरूम में गई। तभी में साली के पास उसके पलंग पर आ गया और फिर चूचियाँ दबाते दबाते मैंने एकदम से अपना एक हाथ उसकी सलवार के अंदर घुसा दिया किस्मत से मेरा हाथ एकदम से उसकी पेंटी के भी अंदर घुस गया और मेरा हाथ सीधे जाकर उसकी चूत पर पड़ा। फिर में साली की चूत को धीरे धीरे सहलाने लगा और वो बीना हिले चुपचाप पड़ी रही उसने कोई विरोध नहीं किया। तभी मैंने अपनी एक ऊँगली साली की चूत में डाल दी। तभी वो अचानक से पूरी हिल गई और मुझे अंदाजा हो गया कि वो चुदाई के लिये तैयार है। फिर मैंने अपनी पत्नी के डर से ऊँगली को बाहर किया और उसे चूमने लगा। फिर मैंने उसे करीब पांच मिनट तक चूमा और छोड़ दिया और सही मौके की तलाश में लगा रहा।फिर जब भी वो मुझे देखती हमेशा एक अच्छी सी मुस्कान देकर मुझे चुदाई के लिये न्यौता दे कर चली जाती और में अंदर ही अंदर जलकर राख होता रहता था और भगवान से कहता कि वो दिन.. ना जाने कब आएगा? तभी एक दिन मेरी किस्मत चमक उठी और मुझे जिस मौके की तलाश थी वो आज मुझे मिल गया। मेरी (निऊहिंदीसेक्सस्टोरी.कॉम) पत्नी डॉक्टर के पास जाँच के लिये मेरी माँ के साथ चली गई मैंने माँ को कहा कि में भी चलूं लेकिन माँ ने मना कर दिया और कहा कि तू क्यों परेशान होता है? और फिर घर पर कामिनी भी अकेली कैसे रहेगी? फिर में माँ की इस बात से सहमत था। दोस्तों ये कहानी आप निऊहिंदीसेक्सस्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने डॉक्टर से एक दिन पहले बात की थी और मेरी पत्नी का नंबर लगा दिया था। फिर उस दिन मुझे पता था कि आज घर पर करीब तीन, चार घंटो के लिये बस हम दोनों थे में और मेरी साली और कोई नहीं फिर क्या था.. आज तो बस मेरी चाँदी ही चाँदी थी। फिर करीब सुबह के दस बजे मैंने.. माँ और मेरी पत्नी को घर के बाहर से विदा किया और फिर में दरवाजा अंदर से बंद करके अंदर चला आया और सीधा अपने कमरे में गया और वहाँ से मैंने एक कंडोम का पैकेट लिया और अपनी ज़ेब में रख लिया। फिर में सीधा किचन में गया जहाँ पर कामिनी काम में व्यस्त थी। तभी मैंने उसे अचानक पीछे से पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा और  साली की बूब्स को दबाने लगा लेकिन उसने कोई भी विरोध नहीं किया। फिर मैंने किचन में ही उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए और उसने अपना हाथ आगे बड़ा कर मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। तभी मैंने उससे कहा कि चलो अब हम चुदाई पलंग पर करते है। फिर मैंने पलंग पर लेटा दिया और लेटते ही मैंने उसे पकड़ कर उसके होंठो को अपने होंठो से दबा लिया और फिर उसे चूमने लगा। फिर पांच मिनट किस करने के बाद में नीचे हुआ और उसके बूब्स को कुर्ती के ऊपर से दबाने लगा। www.newhindisexstory.com तभी कामिनी की सांसे तेज होती जा रही थी। फिर उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और में उसके ऊपर था और उसके बूब्स दबा रहा था और फिर उसकी गर्दन पर अपनी जीभ से चाट रहा था।तभी में ऊपर से हटा और फिर उसे बैठाकर उसकी कुर्ती को उतार दिया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। फिर जैसे ही मैंने कुर्ती उतारी उसके गोर गोर 32 के बूब्स मेरे सामने आ गए। में पागल सा होने लगा (निऊहिंदीसेक्सस्टोरी.कॉम) और कामिनी को नीचे दबाकर उसके बूब्स पर टूट पड़ा। फिर एक हाथ से उसके सीधे बूब्स को और जोर से और फिर दूसरे बूब्स को मेरे मुहं में लेकर चूस रहा था और हल्के हल्के दबा रहा था। फिर मेरे हर बार दबाने के साथ कामिनी का जोश बढ़ता जा रहा था और जोर से उनको चूसने और मसलने लगा। कामिनी को भी मजा आने लगा और उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।

फिर मैंने  साली की चूचियों को जी भर कर चूसा और चूसते-चूसते ही में एक हाथ से उसकी चूत पर ले गया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा। फिर थोड़ा फिर में धीरे-धीरे उसकी सलवार में हाथ डाल कर पेंटी के अन्दर अपना हाथ ले गया और  साली की चूत को सहलाने लगा। सच में कामिनी की चूत बहुत ही सेक्सी और कोमल थी.. में तो बस मदहोश हो गया था। फिर में धीरे धीरे उसकी चिकनी चूत को सहलाने लगा। तभी उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी और वो मुझे कहने लगी थी अब और बर्दाश्त नहीं होता प्लीज लंड डालो ना।तभी में समझ गया कि अब ये पूरी तरह से गरम हो चुकी है। फिर मैंने जल्दी से उसकी सलवार का नाड़ा खोलकर उसे उतार दिया और फिर पेंटी के ऊपर से ही उसको चूमने लगा। फिर मैंने अब मौका गंवाए बिना उसकी पेंटी को भी उतार फेंका। फिर में जल्दी से नीचे आया और फिर अपने दोनों पैर फैलाकर लेट गया और उसे अपने ऊपर खींच लिया। तभी वो समझ गई और मेरे लंड को हाथ में लेकर ऊपर नीचे करने लगी। फिर जैसे ही उसने हिलाना शुरू किया मुझे करंट के झटके लगने लगे क्योंकि पहली बार किसी दूसरी लड़की के हाथ में मेरा लंड था। फिर में लंड धीरे से उसकी चूत में घुसाने लगा लेकिन उसकी चूत बहुत टाईट थी।
तभी मैंने धीरे से एक धक्का दिया लंड चूत के अंदर चला गया। फिर उसकी चूत से खून बहने लगा था और कामिनी आँखें बंद किये सिसकारियां भर रही थी। तभी मुझे सही मौका मिला और अचानक मैंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा 5 इंच का लंड उसकी चूत की गहराइयों में डाल दिया। तभी वो बहुत जोर से चीखी और जोर से तड़पने लगी वो दर्द से छटपटाने लगी और कहने लगी कि प्लीज मुझे छोड़ दो और फिर वो जोर जोर से रोने लगी। www.newhindisexstory.com फिर पाँच मिनट तक में सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ फैरता रहा। तभी धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और तभी थोड़ी देर में उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी हिल हिल कर चुदाई का मज़ा लेने लगी।(निऊहिंदीसेक्सस्टोरी.कॉम) फिर करीब 15 मिनट तक में उसे बिना रुके चोदता रहा और इतनी देर में उसकी चूत गीली हो गई और उसका दर्द कम हो गया और वो बहुत मज़े लेकर चुदवाने लगी। फिर वो भी नीचे से गांड हिलाकर मेरा साथ दे रही थी और बोल रही थी अह्ह्ह ईईइ और जोर से मुझे चोदते रहो और जोर से चोदो मुझे। तभी वो एकदम से अकड़ गई और झड़ गई। फिर में अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा कुछ देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर में उसे जोर जोर से चोदता रहा। फिर करीब दस मिनट बाद में उसकी चूत में झड़ गया और मैंने पूरा वीर्य कामिनी की चूत में डाल दिया। फिर मुझे कोई डर नहीं था क्योंकि मैंने पहले से ही लंड पर कंडोम चड़ा लिया था। दोस्तों फिर चार घंटो में मैंने करीब उसकी दो बार चुदाई की फिर जब भी मुझे चुदाई का मौका मिलता तो में कामिनी की चुदाई करता और अपने लंड को शांत करता। दोस्तों मैंने कभी भी कामिनी को बिना कंडोम के नहीं चोदा क्योंकि उसकी अभी शादी नहीं हुई थी और कभी भी मेरी पत्नी को भी पता नहीं चला ।। कैसी लगी मेरी  साली की चुदाई कहानी ,अगर तुम मेरी सेक्स की कहानी पसंद करता है तो कृपया साझा करें,अगर तुम मेरी  साली की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे add now Facebook.com/KaminiSharma

कुमारी बहन की चुदाई की कहानियों

हेलो दोस्तों, आज जो भाई बहन की सेक्स कहानियां बताने जा रहा हू वो मेरी छोटी बहन की चुदाई की हैं
मेरा नाम राजीव है और मेरी एक छोटी और एक बड़ी बहन है. छोटी है रिया १९, जो मुझसे ३ साल छोटी है. वो बहुत ही सेक्सी है. .ये बात एक साल पहले की है. उस टाइम मेरे दिमाग में अपनी बहन की चुदाई का ख्याल भी नहीं था. पर एकदिन, मैं टॉयलेट करने गया और उसमे से निकला और अपना फ़ोन अन्दर वाशबेसिन पर ही भूल गया, जो डोर से ही अटैच्ड है. रिया नहाने घुसी. मुझे याद आया, कि मैं तो फ़ोन टॉयलेट में ही भूल गया. मैं फ़ोन लेने टॉयलेट में गया और जैसे ही डोर ओपन किया. तो मैं दंग रह गया. रिया पूरी नंगी खड़ी थी.
वो इतनी सेक्सी लग रही थी. उसका पूरा जिस्म सोने की तरह चमक रहा था. वो अपना जिस्म छुपा रही. मैंने अपना फ़ोन उठाया और बाहर आ गया. फिर, मेरे दिमाग पर हवस का शैतान हमला करने लगा. मैं उसके बारे में गन्दा सोचने लगा और मुठ मारने लगा. वो नहाकर निकली, पर कुछ कहा नहीं. मैं उसे नंगा देखकर पागल हो गया था. अब मैं रिया को चोदना चाहता था कैसे भी. मैंने मुठ मारी और सो गया. अगले दिन, मैंने रिया से बात करी और बोला – सॉरी. गलती से फ़ोन वहां रह गया था.
मुझे पता नहीं था, कि तुम अन्दर हो. वो बोली – कोई बात नहीं. पर तुमने सब कुछ देखा क्या? मैंने कहा – हाँ, सब कुछ देख लिया. फिर मैंने बोला – रिया एक बात बोलू, मानोगी? वो बोली – नहीं बताओ. मैंने कहा – कल तेरा सब कुछ देख लिया. तू मुझे बहुत सेक्सी लगती है. मैं तुझे एक बार फिर से न्यूड देखना चाहता हु. वो बोली – तुम पागल हो गये हो, क्या? मैंने कहा – एक बार तो देख लिया है. एक बार और देखने में क्या होगा. मैंने कहा – किसी को पता नहीं चलेगा. प्लीज एक बार, बस एक बार. प्लीज. प्लीज. प्लीज. वो बोली – ठीक है और वो शर्मा रही थी. फिर बहन पूरी नंगी हो गयी. मैं तो सेक्स के मारे पागल ही रहा था. बहन की खड़े गोल बूब्स और चिकनी चूत.. आआह्हह्हह्हह्ह .. क्या बताऊ दोस्तों… क्या कयामत लग रही थी. मन कर रहा था, अभी ऐसे ही चोद दू. पर मैंने खुद पर कण्ट्रोल किया, फिर मैं उसे छुने लगा. वो मना कर रही थी, पर मैं नहीं मान रहा था. मैंने उसके चुचे पकड़ लिए और दबाने लगा और चूसने लगा. मैं अपने हाथ से बहन की चूत सहलाने लगा. वो मुझे हटा रही थी.www.newhindisexstory.com पर मैं नहीं माना और वो छुटने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रही थी. पर मैं उसे चूमता ही जा रहा था. फिर वो भी गरम होने लगी और उस टाइम घर में कोई नहीं था. इसलिए मैं उसे चोदना चाहता था. अब मैंने उसे नीचे लिटाया और अपना ८ इंच का लंड बहन की चूत में डालने लगा. एक धक्के में सिर्फ टोपा ही अन्दर गया. उसकी चीख निकलने लगी आआआअह्हह्हह्ह आआआअम्मम्मम्मम. फिर मैंने दूसरा जोरदार धक्का मारा, तो मेरा पूरा लंड सील तोड़ते हुए, उसकी चूत में घुस गया. मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था की मैं अपनी बहन की चुदाई कर रहा हूँ. वो बुरी तरह से चीखी आआआआआ आआअह्हह्हह्ह आआआआआआआआआअ.. भाई… मैं तो मर गयी… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज निकालो इसे बाहर.. प्लीज निकालो …. बाहर निकालो… मैं थोड़ी देर रुका और उसको चूमता रहा. फिर, थोड़ी देर बाद, मैं हलके – हलके धक्के लगाने चालू किये.. अब उसे (निऊहिंदीसेक्सस्टोरी.कॉम) भी मज़ा आ रहा था. अहहः अहहहः और तेज.. जोर से .. अहहः अहहहः म्म्म्मम्म मैंने धक्को की स्पीड बढाई और २० मिनट तक चोदने के बाद, मैं अपना स्पर्म बहन की चूत में छोड़ दिया. मैं उसके ऊपर लेता रहा और उसके चुचे चूसने लगा. फिर मैं उठा और उसके मुह में लंड डाल दिया. वो लोलीपोप की तरह मेरे लंड को चूस रही थी. मैंने १० मिनट तक उसके मुह में धक्के मारे और उसके मुह को चोदा और उसके मुह में ही झड़ गया. वो मेरा पूरा स्पर्म पी गयी.

फिर थोड़ी देर बाद, मैं फिर चार्ज हो गया. वो मना करने लगी. पर मेरे सिर पर हवस सवार थी. मैंने उसकी डौगी बनाया और उसे चोदने लगा. वो भी साथ देने लगी अहहहाह आआअह्हह्हह भाई धीरे करो.. अहहः. मैंने धक्को की स्पीड बढ़ा दी और उसे जोर जोर से चोदने लगा. वो दर्द के मारे चिल्ला रही थी आआआआआ … मर गयी.. धीरे करो..भाई आहाहह्हा… मैं फिर से झड़ने वाला था. मैंने लंड को उसकी चूत से निकाला और उसके मुह में डाल दिया. मैं उसके मुह में www.newhindisexstory.com ही झड गया. उसने मेरा लंड चूसकर साफ़ कर दिया. उसकी चूत लाल हो चुकी थी. फिर मैं उसके चुचे चूसने लगा आहाहहः. तभी अचानक मेरा दोस्त आ गया और उसने हमें चुदाई करते हुए देख लिया और फोटो ले ली. मैं डर गया और रिया अपना जिस्म छुपाने लगी. तभी वो बोला – यार, क्या हो रहा है? मैंने कहा – कुछ नहीं. वो बस… वो बोला – साले, अपनी बहन को चोदता है. मैं सब को ये फोटो दिखा दूंगा. मैंने कहा – नहीं यार, ऐसा मत करियो. तुम्हे क्या चाहिए? वो ले ले, पर ऐसा मत करियो. वो बोला – मुझे रिया को चोदना है. रिया घबरा गयीम क्योंकि वो बहुत देर से चुद रही थी.

मैंने कहा – कुछ और मांग ले, प्लीज. वो बोला – नहीं, मुझे रिया को ही चोदना है अभी. रिया रोने लगी. तो मैंने कहा – देख रिया, अब तो तुझे इससे चुदवाना ही पड़ेगा. नहीं तो बदनामी हो जाएगी. वो बोली – ठीक है. राहुल नंगा हो गया और उसे चूमने लगा. रिया को ना चाहते हुए भी चुद्वानी पड़ी. फिर दोस्त ने अपना लंड उसकी चूत में डाला, जो पहले ही लाल हो चुकी थी. फिर वो जोर – जोर से धक्के मारने लगा. रिया दर्द से चिल्ला रही थी.. अहहहः अहहहहः धीरे करो.. प्लीज राहुल … धीरे … राहुल तेज – तेज धक्के लगा रहा था और देर तक उसे चोदने के बाद, उसने अपना लंड उसकी चूत में से निकाला और उसके मुह में डाल दिया और झड़ गया. रिया को मजबूरन, (निऊहिंदीसेक्सस्टोरी.कॉम) राहुल का स्पर्म पीना पड़ा. फिर वो मादरचोद दुबारा भी चार्ज हो गया और फिर से रिया को चोदना चाहता था. रिया की चूत फूलकर लाल हो चुकी थी. फिर भी उसने अपना लंड उसकी चूत में घुसाया और चोदने लगा. रिया दर्द से कराह रही थी अहहहः अहहहः अहहः प्लीज छोड़ दो मुझे अब.. अब जाने दो प्लीज.. अहहहः. पर वो हरामी जोर – जोर से धक्के मारने लगा और उसकी चूत के ऊपर ही झड़ गया. फिर उसने रिया को लंड चुसया और चला गया . रिया की हालत ख़राब हो गयी थी. उसकी चूत लाल हो गयी थी और सूज गयी थी. उसकी चूत से हल्का – हल्का खून भी निकलने लगा था. www.newhindisexstory.com फिर मैंने उसकी चूत को साफ़ किया और उसे उठाया. रिया से चला भी नहीं जा रहा था. मैंने उसको दवाई लगाकर उसे बेड पर आराम से लिटा दिया और चादर पर लगा खून साफ़ कर दिया. अब मैं उसको जब चाहू चोद लेता हु. अब रिया मेरी बहन नहीं, मेरी रंडी बन चुकी है.दोस्तों आशा रखता हूँ की आप को मेरी बहन की चुदाई की यह कहानी पसंद आई होंगी. कैसी लगी मेरी बहन की सेक्स कहानी ,अगर तुम मेरी सेक्स की कहानी पसंद करता है तो कृपया साझा करें .कैसी लगी मेरी सेक्स कहानी ,अगर तुम मेरी सेक्स की कहानी पसंद करता है तो कृपया साझा करें,अगर तुम मेरी बहन की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे add now Facebook.com/RiyaSharma

असंतुष्ट मालकिन की चुदाई कहानी

दोस्तों आज जो नौकर और मालकिन की चुदाई कहानी बताने जा रहा हू मेरी मालकिन की चुदाई कि
 मेरा नाम विकाश है मै एक दुकान में नौकर  हु  मै  आप लोगो के साथ एक आसली  घटना सेयेर कर रहा हु जो काफी सेक्सी है मै आपने मालिक के घर मे ही रहता हु  मैलिक की बीवी काफी सुंदर थी उनकी सदी के मात्र 3 महीने पहले ही  हुआ था  एक  रत  मेरी नींद खुली और मै  पानी पिने के लिए उठा मै  जैसे ही आगन में पहुचा तो  मैलिक के रूम से कुछ आवाज सुनाई  दी मै धीरे से खिरकी के पास जाकर देखा  तो मालिक मालकिन को चोदने की तेरारी कर  रहे थे मै  छुप कर  देखने लगा मैलिक का लंड  काफी छोटा था और  मालकिन को ठीक से पेल नही परहे थे मैल्किन दोनों पैरप को फैला कर मालिक के लंड को आपने हाथो से सहला रही थी  मालिक मालकिन के बूर को सहला रहे रहे थे मालिकिन का बूर काफी फुल्ल हुआ था!
बूर के किनारे किनारे छोटे बल थे बूर में काफी रसदार  चिप चिप मनो बूर ख राहा हो की जल्दी से इस में करक लंड घुसेरो.मेरा लंड खारा हो गया था मन तो कर  रहा था की मालकिन के बूर को चूस लू और आपना लंड को उसके बूर के पास लेजाकर रगर रगर के लाल कर  दू !मेरा मन बिलकुल बेचन हो गया आचनक मालिक को अक दिन कम से बहर जाना परा उस दिन दुकान बंद कर  के वह चले गये  घर में मै और मालकिन थी मेरी नजर हमेसा मालकिन पर ही रहता थी  मै ने मालकिन को कपरे लेकर बथरूम में जाते हुए देखा मै  जल्दी से छत पर चला गया वह से बाथरूम साफ नजर आता था मालकिन ने कपरे धोने के बाद नहाना सुरु किया  क्या कहु दोस्तों नजारा देखने लायक था उसने पहले आपने बेलौज को बॉटम को खोला उसे के उन्दर की चोली उजला रग का था बन्दुक की नोख की तरह चोख चोख चूची ! www.newhindisexstory.com फिर उसने चोली के हुक को खोला ऒऒऒऒऒऒओ  ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह  मेरे लंड में आग लग गया  हो जैस मेरा लंड लगता  था की चढ़ी फार कर  बहर आजाये गा !उसने अपना सारा कपर उतर दिया;मेरा लंड और पेलने के लिए मचलने लगा मै बेकाबू होता जारा था  मै मूठ मरना सुरु करदिया तभी आचनक मालकिन की नजर मेरे पर परी और मालकिन ने मुझे मूठ मरते हुए देख लिया मै डरने लागा की मालिकन मुझे घर से निकल देगी पर आशा कुछ नही हुआ मालकिन ने मुझे इशारे से आपने बाथरूम  मे बुलाया और बिना कुछ बोले मालकिन ने मेरे लंड  को चूसने लगी! मेरा लंड  तो पहले ही बेकाबू था मालकिन ने जैसे ही मुह में लेकर 2-3 बार चूसा मेरा सारा माल बाहर आगया ! मालकिन ने बोल की आज रत को तुम मेरे रूम में सोना ,मै समझ गया की मालकिन की चुदाई  आज तो मै  ही करुगा i जैसे ही रात हुआ मै मालकिन के घर में गया मालकिन पहले से ही तेया बैठी थी बस उपर से पतली टी नाईट ड्रेस पहनी रखी  थी मै मालकिन के पास गया मालकिन ने मेरे कपरे उतरने लागी मै भी जल्दी से मालिकन के कपरे उतर दिया !और मै मालकिन की चूची को चूसने लागा  चूऊऊऊऊउ  वूऊऊऊउ  आआआअ च्चुच्च्चुच्च्चु मालकिन के मुह से  आआआअ ऊऊऊऊउ की आवाज आ रही थी मालकिन को बहुत मजा आ रहा था थोरी देर मे मालकिन से मेरा  लंड चूसने लगी  मै भी काफी माजा  था मालकिन मेरे लंड को देख कर काफी खुस थी मेरा लंड 3" लम्बा ओर 2" मोटा था ! www.newhindisexstory.com फिर मै मालकिन की कछी (पैनटी) को थोर सा हटाकर आपने लंड  को रागरे लगा और मालकिन से बूर को चुसना सुरु किया  मालकिन थोरी ही देर में मालकिन के बूर से पानी निकलने लगा !   अब उन से बरदास नही हो हो रहा था उस ने जल्दी से मेरे लंड  को पाकर और बूर के पास सटा दिया !मै भी बेताब था मै ने धीरे धीरे उंदर डालना सुरु किया मालकिन भी पुरे जोस में थी मानों कोई पहली बार पेल रहा हो मै भी थोरी देर में जोर जोर से पेलना सुरु क्या आआआआआआअ  ऊऊऊऊऊऊऊ  हहहहहहाहा ऒऒऒओ  ईईईईईईईईइ  की आवाज मालकिन के मुह से निकल रहे थे ! 15-20 मिनिट के बाद मालकिन के बूर से माल (स्पन) बहर निकलने लगा ! इतना स्पन निकला की मनो लग राहा था की  आज तक किसी ने मालकिन को चोदा ही नही हो मालकिन काफी संतुस्ट थी और मै आज भी मालकिन को  अपनी बीबी की तरह मजे उठता हु!  जब भी मालिक नही रहते उस दिन मालकिन की चुदाई पकी है ! दोस्तों कैसी लगी मॉल्किन की चुदाई कहानी .कृपया साझा करें ,, यदि मेरी मॉल्किन की चुदाई करना चाहते हैं, तो अभी जोड़ें Facebook.com/MalaSingh

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