पापा के दो दोस्तों से मम्मी की समूह सेक्स

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मेरी मम्मी का नाम रंजना है फिगर 40 कमर 36 गांड 40 है और उस दिन मेरे पापा किसी काम से बाहर गये हुए थे। घर पर में और मम्मी अकेले थे। उस दिन शाम को पापा के दो दोस्त घर पर आए उनको मालूम नहीं था कि पापा घर पर नहीं है। फिर हमने उनको बताया कि पापा 15 दिन से घर से बाहर हैं और अगले सप्ताह तक आएँगे। तभी वो मम्मी की तरफ देखकर बोले कि ठीक है भाभी जी फिर हम चलते हैं फिर कभी आएँगे और फिर हल्का सा मुस्कुरा कर चले गये.. तभी मम्मी भी थोड़ी सी हँसी।

फिर उसके बाद में अपने रूम में चला गया और मम्मी अपने रूम में। तभी एक दोस्त दोबारा आया और मम्मी को कुछ हल्का सा बोल कर चला गया। तभी मैंने मम्मी से पूछा कि वो अंकल क्या बोला रहे थे? तभी मम्मी ने कहा कि वो बोल रहे थे कि पापा को बता देना कि हम आए थे और मैंने कहा कि ठीक है। फिर हमने रात का खाना खाया और में अपने रूम में चला गया और कुछ टाईम बाद मम्मी भी रूम में चली गई तभी कुछ देर बाद मम्मी के कमरे में टेबल की आवाज़ आई फिर मैंने स्टोर रूम के छोटे वेंटिलेटर से देखा कि मम्मी टेबल को सीधा कर रही थी आप ये कहानी आप निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। और फिर अपने रूम की सफाई कर रही थी फिर रात में सफाई मुझे समझ में नहीं आई। तभी में समझ गया कि कुछ गड़बड़ है और फिर में थोड़ी थोड़ी देर बाद रूम में झाँकता रहा। तभी करीब रात के 12.15 बजे जब मैंने अंदर झाँका तो में दंग रह गया मम्मी ने टाईट गाउन पहना हुआ था और पापा का एक दोस्त जिसका नाम चौहान है सोफे पर बैठा हुआ था और मम्मी चौहान की गोदी में बैठी हुई थी और उनकी बातें मुझ को साफ साफ सुनाई दे रही थी।
चौहान : प्रशांत (मेरे पापा) कब से गया हुआ है तो फिर पार्क सूखा होगा?
मम्मी : पार्क भी सूखा है और दूध का भी पनीर बन गया है।
चौहान : कोई बात नहीं आज सब ठीक कर देंगे जब पार्क का काम ज्यादा हो जाए तो दो या तीन माली को काम करना पड़ता है।
मम्मी : क्यों तुम्हारी वाईफ कहाँ है?
चौहान : घर पर और बोलकर आया था कि आज रात को प्रेम के घर काम है और में वहीं पर रहूँगा।
मम्मी : ठीक है।
फिर चौहान ने अपने एक हाथ से पकड़कर मम्मी का एक बूब्स बाहर निकाला।
चौहान : उफफफ्फ़ साली रांड कितना बड़ा दूध का ड्रम हो गया है।
मम्मी : तो देर ना करो और जल्दी से खाली करो ना इसको।
चौहान : ये एक से कहाँ खाली होंगे बहुत टाईम लगेगा।

फिर धीरे धीरे मम्मी गरम हो गई और अपने आप ही उसने अपना सारा का सारा गाउन उतार दिया। मम्मी अब सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी और मम्मी के दोनों बूब्स ब्रा के बाहर लटक रहे थे और पापा के दोस्त ने मम्मी की बूब्स चूस रहा था और मम्मी उसका लंड हिला रही थी। फिर पापा के दोस्त मम्मी की पेंटी भी उतार दी और मम्मी की शेव्ड चिकनी चूत देखकर पागल हो गया और कुत्ते की तरह मम्मी की चाटने लगा।
चौहान : रंजना बुरा मत मानना प्रेम बाहर इंतजार कर रहा है प्लीज़ क्या उसको भी बुला लूँ?
मम्मी : लेकिन वो किसी को कुछ बोलेगा तो नहीं?
चौहान : अरे नहीं वो कभी किसी को कुछ नहीं बोलेगा और फिर चौहान ने फोन लगाया और वो भी पीछे के दरवाज़े से अंदर आ गया। तभी प्रेम मम्मी को नंगा देखा कर पागल सा हो गया और बोला कि यार चौहान मस्त माल है इसकी तो लेने में बहुत मज़ा आएगा।आप ये कहानी आप निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
चौहान : हम ऐसे ही इसके दीवाने थोड़ी हैं अभी जब चोदेगा तब देखना कैसी सैर करवाएगी तुझे।
चौहान : प्रेम चल अब अपने कपड़े उतार और तैयारी कर।
फिर प्रेम ने अपने सारे कपड़े खोल दिया और वो तीनो नंगे बैठे हुए थे चौहान और प्रेम के पैरो के बीच से साँप लटक रहे थे और मम्मी की छाती पर आम और नीचे साँप का बिल छुपा हुआ था। चौहान अब बेड पर लेट गया और मम्मी ने घुटनो के बल बैठकर अपनी चूत पापा के दोस्त के मुहं के ऊपर रख दी और प्रेम का लंड चूसने लगी। चौहान की चाटने की आवाज़ और प्रेम की आह आह आह और मम्मी की लंड चूसने की आवाज़ें बहुत साफ साफ आ रही थी।

प्रेम : रंजना चलो अब अपना पार्क तो चाटने दो ना।
मम्मी : पहले इस कुत्ते को तो चाटने दो ना.. फिर मम्मी चौहान के ऊपर से उठी और बेड पर दोनों पैर फैला कर लेट गयी चौहान बेड के नीचे खड़ा हो गया और प्रेम मम्मी की मोटी मोटी जांघो में उसका गार्डन चाटने लगा और चौहान ने मम्मी के मुहं में अपना पानी का पाईप (लंड) डाल दिया।
चौहान : चल साली कुतिया अब मेरा पानी तोड़ा आगे तक कर.. ताकि तेरे गार्डेन को अच्छी तरह सींच सकूँ।
मम्मी इधर लंड चूस रही थी उधर अपने हाथों से प्रेम का मुहं दबा रही थी ताकि वो अच्छी तरह से चाट सके।
चौहान : रंजना चल अब घोड़ी बन जा।
प्रेम : हाँ जल्दी बनो अब मुझसे कंट्रोल नहीं होता।
तभी मम्मी झट से घोड़ी बन गई और वो दोनों दोस्त अब मम्मी के पीछे खड़े थे।
चौहान : प्रेम कैसा है मेहमान का रूम?
प्रेम : अब मेहमान अंदर जाएगा तभी तो बता पाऊँगा कि कैसा है।आप ये कहानी आप निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
चौहान : रंजना बिना देखे बताना कि किसका मेहमान अंदर गया है तब मानूँगा तेरा चुदाई का अनुभव।
फिर प्रेम ने मम्मी की चूत में अपना लंड डाल दिया
मम्मी : ये प्रेम का गया है ना चौहान?
चौहान : अरे वाह रंडी बिल्कुल सही लेकिन तुमको कैसे पता चला कि इसका लंड अंदर गया है?
मम्मी : अरे इतना अनुभव है की अगर में क़िसी को पेशाब करती हुए उसका लंड देख लूँ तो भी जब चूत के अंदर जाएगा बता दूंगी। प्रेम का तो मैंने चूसा है और तुम्हारा तो बहुत बार लिया है।
प्रेम : वाह रे वाह तू तो पूरी खिलाड़ी है।
मम्मी : चलो चौहान अब आगे आओ और लंड को मेरे मुहं में डालो।

फिर प्रेम पीछे से झटके मार रहा था और चौहान आगे मम्मी के मुहं में झटके मार रहा था। फिर प्रेम ने अपने लंड को बाहर निकाला और चौहान को बोला कि चलो अब तुम डालो और में इसके मुहं में डालकर चुदाई करूँगा। मम्मी बिस्तर पर लेट गयी और प्रेम मम्मी के पैरो के ऊपर बैठ गया और अपना लंड मम्मी के मुहं में डालकर झटके मारने लगा और नीचे से चौहान मम्मी की चूत का भूत बना रहा था। झटका इतना ज़ोर का था कि बेड की आवाज़ें आ रही थी और मम्मी धीरे धीरे करो जय उठ जाएगा कह रही थी.. लेकिन वो तो बस चुदाई में व्यस्त थे उन्हें दुनिया से क्या मतलब।
चौहान : ठीक है लेकिन वो गहरी नींद में होगा और साथ में उसको तुम्हारे ऊपर कोई शक थोड़ी है कि मेरी माँ किसी से चुदती है।आप ये कहानी आप निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
मम्मी की चूत और चौहान अंकल का लंड अंदर बाहर जाते मुझे सब कुछ साफ साफ नज़र आ रहा था और मम्मी की चूत में से थोड़ा थोड़ा पानी टपक रहा था फिर वो मम्मी की चूत के ऊपर से उतरे और सोफे पर चले गये। मम्मी सोफे पर लेट गई मम्मी का एक पैर सोफे के पीछे के हिस्से पर था और प्रेम ने मम्मी की चूत अपने लंड से पूरी तरह भरा हुआ था और वो झटके मार रहा था और चौहान मम्मी को चूस रहा था और बूब्स दबा रहा था।
प्रेम : रंजना मेरा होने वाला है।
मम्मी : बाहर निकालो और इधर आओ चौहान अब तुम डालो।
मम्मी : चौहान जल्दी जल्दी झटके मारो निकलने वाला है।

फिर चौहान तेज़ तेज़ झटके मारने लगा इधर मम्मी ने प्रेम का लंड हाथ से पकड़ लिया और उसे मसल रही थी। तभी मम्मी ने जल्दी से प्रेम का लंड छोड़कर चौहान के लंड को अपने हाथों में दबा लिया और नीचे से दोनों जांघो में चौहान के लंड को दबा दिया। आप ये कहानी आप निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मम्मी का काम हो गया था। फिर चौहान और प्रेम दोनों मम्मी के पास खड़े हो गये और मम्मी दोनों हाथों से एक एक करके उनकी मुठ मारने लगी। फिर दोनों का वीर्य मम्मी ने अपने दोनों बूब्स पर गिरा दिया।
मम्मी : वाह मज़ा आ गया इतना गरम माल है कि बूब्स के ऊपर फेविकोल की तरह चिपक गया है।
प्रेम : चौहान इस साली ने इतना रगड़ा कि अब 10 दिन तक इसे कोई ज़रूरत नहीं। तभी मम्मी हंसने लगी और फिर वो अपने अपने कपड़े पहन कर चले गए । कैसी लगी मम्मी की समूह सेक्स स्टोरी , रिप्लाइ जररूर करना , अगर कोई मेरी मम्मी की चूत चुदाई करना चाहते हैं तो उसे अब जोड़ना Facebook.com/RanjanaSharma

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