भाई का लण्ड चूस चूस कर चूत में लिया

मैंने  लेट कर सोचने लगी कि क्या वास्तव में लंड चूसने में और चूत में डलवाने में इतना मज़ा आता है?क्योंकि मैंने अब तक किसी के साथ ये सब नहीं किया था और न ही किसी नौजवान का लंड देखा था।अब मेरा मन भी लंड को देखने और उसको छूने का और उसको अपने मुंह में लेकर चूसने का बहुत मन कर रहा था।अभी मैं यह सब सोच ही रही थी कि अचानक साजन भाई ने मेरी तरफ़ करवट ली और उनका एक हाथ मेरे वक्ष के ऊपर आ गया।भाई का लंड भी मेरे पैर की गर्मी से तन कर खड़ा हो गया था।तभी मुझे भाई का ख्याल आया कि क्यों न साजन भाई का ही लंड छू कर और चूसकर देखा जाए।भाई का लंड भी तो ऐसा ही होगा जैसा कि इस वीडियो में था।

जब इस फ़िल्म में भाई बहन सेक्स कर सकते हैं तो रियल लाइफ में भी तो होता ही होगा क्योंकि फ़िल्म में भी तो वही दिखाते हैं जो रियल लाइफ में हो रहा होता है !क्यों न भाई को ही राजी कर लूँ !अगर भाई राजी हो गए तो किसी को पता भी नहीं चलेगा और मेरे मन की इच्छा भी पूरी हो जायेगी।मेरे मन में ये बातें आते ही मन ख़ुशी से झूम उठा।फिर क्या था, भाई का हाथ अपनी चूची से आराम से हटाया इतनी आराम से कि वो जागे नहीं।फिर मैंने भाई का कम्बल उनके लंड के ऊपर से उठाया तो उनका खड़ा लंड उनके लोअर में दिख रहा था।
वो तो लोअर के ऊपर से ही बहुत बड़ा लग रहा था।मैंने अपने हाथ भाई के लोअर की तरफ बढ़ाये तो मुझे घबराहट होने लगी, मेरे हाथ कांपने लगे, पर लंड को देखने की इच्छा को मैं दबा नहीं पाई और मैंने धीरे से लोअर खोल दिया।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। लोअर खुलते ही मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैंने कोई किला फ़तह कर लिया हो।मैं कुछ देर रुक गई मेरी दिल की धड़कन मुझे साफ़ सुनाई दे रही थी।कुछ देर रुकने के बाद मैंने भाई का लोअर को ढीला किया और नीचे की तरफ सरका दिया पर लोअर तो लंड में अटक गया।मैंने उसको सही से पकड़ा और फिर लोअर को नीचे कर दिया, अब भाई का लंड मेरी आँखों के सामने था।
परन्तु लोअर अभी ऊपर से ही हटा था नीचे से अभी भी दबा हुआ था मैंने भी उसको निकलने की कोशिश नहीं की।
भाई ने लोअर के नीचे कुछ नहीं पहना था।
फिर मैंने भाई का फ़ोन उठाया और उसकी टार्च ऑन कर दी।
अब मैं भाई का लंड आराम से सही से देख रही थी।
जैसे ही मैंने टार्च भाई के लंड के ऊपर की, हाय राम ! भाई का लंड तो तना हुआ उनके पेट से लगा हुआ था।
भाई का खड़ा हुआ लंड मुझे बहुत प्यारा और सुन्दर लग रहा था।
भाई का लंड जितना मैंने सोचा था वो तो उससे भी बड़ा और मोटा था भाई का लंड 6.5 इंच का था।
मैं काफी देर तक अपने भाई का लंड देखती रही, फिर मैंने भाई के लंड को छूने के लिए हाथ बढ़ाया पर मेरा ध्यान भाई के चेहरे पर था, कहीं वो जाग न जाए।
और फिर मैंने अपने कांपते हाथ से भाई का लंड धीरे से पकड़ लिया।
भाई का लंड बहुत ही गर्म था।
मेरी सांसें तेजी से चलने लगी, मेरे बूब्स तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे।
भाई का लंड हाथ में आते ही मुझे लगा जैसे मुझे कोई खजाना मिल गया हो।
कुछ देर मैंने भाई का लंड ऐसे ही पकड़े रखा, मेरे हाथ की गर्मी से भाई का लंड और भी कठोर हो गया था, वो इतना सख्त हो गया कि भाई के लंड के टोपे की खाल खुलकर नीचे की ओर हो गई थी।
अब लंड का ऊपरी भाग गुलाबी दिखाई दे रहा था जो मुझे लाल लाल सेब की याद दिला रहा था।
लंड का गुलाबी भाग देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया, मन तो कर रहा था कि जल्दी से भाई का लंड मुंह में लेकर चूस लूँ पर मैं कोई जल्द बाजी नहीं करना चाहती थी।
अगर मैं ऐसा करती तो भाई के उठने का डर था।
फिर मैं भाई के लंड को ऊपर नीचे करने लगी बहुत प्यार से!
मुझ ये सब करने में बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी चूत से पानी झरने की तरह चू रहा था।
मेरे होंठ सूखने लगे थे।अब मुझसे ओर सब्र नहीं हो रहा था, बस मन कर रहा था कि अब भाई का लंड मुंह में ले ही लूँ।
इसलिए मैं उठी और भाई के पैरों की तरफ़ सर रख कर लेट गई और मैंने भाई को और अपने आपको कम्बल से ढक लिया।
मैंने अँधेरे में भाई का लंड टटोला।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
जैसे ही मेरे हाथ में भाई का लंड आया तो मेरी धड़कन बहुत तेज हो गई और मेरे हाथ कांपने लगे पर मुझे कोई होश नहीं था, मुझे तो बस लंड चाहिये था, जो अब मेरे हाथ में था।
फिर मैं थोड़ा सा नीचे हुई, अब साजन भाई का लंड मेरे मुंह के सामने था।
मैंने धीरे से अपना मुंह खोला और भाई के लंड की तरफ थोड़ा और सरक गई।
फिर मैंने अपने साजन भाई का लंड अपने मुंह में ले लिया।
अभी सिर्फ मुंह में लंड का सुपारा ही गया था पर मुझे लग रहा था कि मैंने उनका पूरा लंड मुंह में ले लिया।
भाई का लंड बहुत ही ज्यादा गर्म लग रहा था।
कुछ देर मैंने भाई के लंड का सुपारा अपने होंठों में दबाये रखा, फिर मैंने लंड के सुपारे पर अपनी जीभ चलाई तो मुझे लंड का स्वाद कुछ अजीब सा लगा।
भाई के लंड का स्वाद मुझसे बहुत ही अच्छा लगा।
लंड का स्वाद जैसा भी था पर सच कहूँ मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
और फिर यह मेरे साजन भाई का लंड था।
मैंने हाथ से टटोल कर देखा तो अभी भाई का लंड पूरा ही बाहर है। मैंने तो बस लंड का एक भाग ही मुंह में लिया था।
मैं साजन भाई का लंड अपनी जीभ से ऐसे चाट रही थी जैसे कोई बच्चा सोफ्टी के ऊपर की आइसक्रीम चाट रहा हो।जब मैंने महसूस किया कि कोई मेरे लण्ड को छू रहा है तो मैंने अपनी आँख धीरे से खोली तो देखा प्रिया ही मेरे लण्ड को छू रही है।
मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैंने उसको कुछ नहीं कहा।
मुझे यह देखकर कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि शायद उसने, वो जो मैं देख रहा था, वही वीडियो प्रिया ने देख ली थी।
वैसे तो प्रिया जवान थी तो उसका बहकना लाजमी भी था और फिर मेरे तो मज़े ही आ गए जो बैठे बिठाये एक नई चूत का इंतजाम हो गया।
मैंने भी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे उसको पता चल जाये कि मैं जाग रहा हूँ।
मैंने फिर से अपनी आँखें बंद कर ली और ऐसे ही लेटे हुए मज़ा लेता रहा।
प्रिया के शब्दों में:
मैंने भाई का लण्ड मुंह में लिए हुए ही अपनी सलवार और चड्डी को अपने पैरो से पूरी तरह से निकाल दिया जो कुछ देर पहले मेरे पैरों में फंसी हुई थी।
फिर अपने एक हाथ से अपनी गीली चूत को सहलाने लगी।
भाई का लण्ड अब भी मेरे मुंह में था और मैं उनके लण्ड का सुपारा चूस रही थी और एक हाथ से अपनी चूत सहला रही थी।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
मदहोशी का यह आलम था कि मुझे कुछ भी याद नहीं रहा और मैं अपने भाई के लण्ड को कुछ ज्यादा ही जोर से चूस लगी।
साजन- प्रिया को लण्ड चूसना तो आता नहीं था और न ही उसने पहले कभी किसी का लण्ड चूसा था पर वो जिस तरह से भी मेरा लण्ड चूस रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
प्रिया के दांत मेर लण्ड को बार बार लग रहे थे, जब वो लण्ड चूस रही थी।
मुझे हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था पर मज़ा भी बहुत आ रहा था, कई बार तो मेरे मुख से चीख निकलते निकलते रह गई क्योंकि अब प्रिया बहुत जोर से मेरा लण्ड चूस रही थी और उसके दांत मेरे लण्ड पर बहुत लग रहे थे।
पर मैं सब कुछ सहन करता रहा।
इसलिए उसको मैंने कुछ नहीं कहा और न ही कुछ ऐसा किया जिससे उसको यह लगे कि मैं जाग रहा हूँ।
प्रिया- कुछ देर बाद ही मुझे मेरी चूत में ऐसा लगा कि जैसे मुझे पेशाब आने वाला है पर उस टाइम मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं भाई का लण्ड भी चूसना नहीं छोड़ सकती थी और न ही अपनी चूत को सहलाना।कुछ देर बाद ही मुझे लगा कि मेरा पेशाब निकल रहा है और मैं जोर जोर से अपनी चूत को रगड़ने लगी और भाई का लण्ड भी जोर जोर से चूसने लगी कि तभी भाई के लण्ड से कुछ निकल कर मेरे मुंह में आ गया।
मेरी समझ में आ गया कि यह भाई का पानी है जैसे उस वीडियो में दिखाया था।
मैंने भी वैसा ही किया और मैं भाई का सारा माल पी गई।
साजन भाई के लण्ड से निकला हुआ पानी मुझे कुछ हल्का सा नमकीन और खट्टा लगा जो मुझे बहुत पसंद आया और साजन भाई के लण्ड का पानी मुझे इतना अच्छा लगा कि मन करता था कि यह लण्ड हमेशा के लिए मेरा ही हो जाए और जब जी करे उसका पानी पी लूँ।
मुझे भी लगा मेरा पेशाब निकल रहा है पर उसमें मज़ा मुझ बहुत आ रहा था, ऐसा मज़ा मुझे अपनी जिन्दगी में कभी नहीं आया।
आनन्द के मारे मेरी आँखें बंद हो चुकी थी।
जब मेरा पूरा पानी निकल गया तो देखा वो मेरा पेशाब नहीं था।
मुझे समझ आ गया कि यह मेरा माल है जो मेरी ही अपनी चूत का है इसलिए ये इतना गाढ़ा निकला।
अब मैं पूरी तरफ शान्त हो चुकी थी।
भाई को देखा तो वो अभी भी सो रहे थे।
मैंने भाई का लोअर सही से ऊपर कर दिया कि उनको कुछ भी पता न चल सके।
फिर मैंने अपनी सलवार भी पहन कर लेट गई भाई के साथ चिपक कर।
उसके बाद कब मुझे नींद आ गई मुझे कुछ पता नहीं।
सुबह को मैं अपने टाइम से थोड़ा लेट ही उठी थी पर मैं एकदम तरोताजा लग रही थी।
मुझे रात की बात याद आई तो मुझे अब कुछ अजीब सा लगा और सोचने लगी कि अगर भाई जाग जाते तो क्या होता?
फिर वो क्या सोचते मेरे बारे में, पर शुक्र था कि वो नहीं उठे थे।
अब तो मेरी साजन भाई के सामने जाने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।
जबकि वो अभी भी सो ही रहे थे।
मैं नहा धोकर रसोई में गई तो देखा कि मम्मी नाश्ता बना रही हैं।
मुझे आता देख मम्मी मुझसे बोली- क्या बात है आज तू इतना लेट उठी?
तो मैंने मम्मी से कहा- मम्मी आज रविवार है और आज कहीं जाना भी नहीं है, बस इसी वजह से लेट उठी।
मेरी बात सुनकर मम्मी चुप हो गई।
सुबह के आठ बज चुके थे, मम्मी ने नाश्ता बना लिया था तो मम्मी ने कहा- जा पहले अपने भाई को नाश्ता दे आ ! वो उठ गया होगा। जा जल्दी से दे आ ! ऐसा न हो उसको कहीं जाना हो और वो बिना नाश्ता करे बैगर ही चला जाए।
मम्मी ने एक प्लेट में नाश्ता और चाय दे दी।
मेरी साजन भाई के सामने जाने की हिम्मत तो हो ही नहीं रही थी और न ही मैं मम्मी को मना कर सकती थी !
वो पूछती तो मैं क्या जवाब देती?
इसलिए मज़बूरी में मुझे जाना पड़ा।
मैं साजन- प्रिया के जाने के बाद मेरी आँख खुली तो देखा प्रिया जा चुकी थी पर पारुल और मुकेश अभी भी सो रहे थे।
मैंने उन दोनों को उठाया और मैं नहाने चला गया।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
मैं अभी नहा धोकर मैं बाथरूम से बाहर आया और कपड़े पहने ही थे कि प्रिया मेरे लिए नाश्ता लेकर आ रही थी।
उसने अपनी नज़र नीचे कर रखी थी।
प्रिया को देखते ही मुझे रात का वो सीन याद आ गया और मेरे चेहरे पर मुस्कान आई गई।प्रिया को देखते ही मुझे रात का वो सीन याद आ गया और मेरे चेहरे पर मुस्कान आई गई।
जब प्रिया नाश्ता बेड पर रख रही थी तो मैंने प्रिया से कहा- ये दोनों भी उठ गए है इनके लिए भी नाश्ता ले आती!
पर मेरी बात का प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया और वो वापस जाने लगी तो मैंने उसको कहा- प्रिया क्या हो गया तुमको? तबियत तो ठीक है न।
मैं उसको यह दर्शाना चाह रहा था कि मुझे रात की घटना के बारे में कुछ नहीं पता।
और मेरी थोड़ी सी कोशिश के बाद उसको विश्वास हो गया कि मुझे रात की बात का कुछ भी नहीं पता, तब जाकर वो नार्मल हुई।
प्रिया- जब मैं  भाई के सामने गई तो  भाई से नजर नहीं मिलाई जा रही थी। पर भाई की बात से मुझे लगा कि भाई को रात के बारे में कुछ नहीं पता… इसलिए मैं भी अब नार्मल हो गई थी।
फिर मैंने पारुल और मुकेश को भी नाश्ता करवाया, उसके बाद मैंने भाई से पूछा- आपको कहीं जाना तो नहीं है, मम्मी पूछ रही थी तो  भाई ने कहा नहीं आज तो मुझे कहीं नहीं जाना।
इतना सुनकर मैं वापस रसोई में मम्मी का हाथ बंटाने आ गई और मम्मी को भी बता दिया कि आज भाई को कही नहीं जाना।
कुछ देर बाद पापा भी अपने ऑफिस निकल गए।
हमें घर का काम खत्म करते करते मुझे 11 बज गए थे और 11:30 पर हमारा घर का सारा काम ख़त्म हो चुका था।
दोपहर में 12 बजे मम्मी ने मुझसे कहा- मैं पड़ोस में जा रही हूँ, 2-3 घंटे में आ जाऊँगी, खाना मैंने बना दिया है, जब भूख लगे खा लेना और अपने भाई को भी खिला देना।
मैंने कहा- ठीक है मम्मी !
और फिर मम्मी तैयार होकर पड़ोस में चली गई।
साजन भाई, पारुल और मुकेश टी वी देख रहे थे।
मुझे रात की बात याद आई और मैं सोचने लगी कि यह अच्छा हुआ, मम्मी पड़ोस में चली गई। आज मैं कोशिश करती हूँ कि किसी तरह से मैं भाई को अपने साथ सेक्स करने के लिए तैयार कर सकूँ। क्योंकि रात को भाई का चूसने के बाद मेरे अन्दर चुदाई का कीड़ा जोर मार रहा था और मैं अभी चाहती थी कि भाई भी मेरी योनि को चूसे, खा जाए और जम कर मेरी चुदाई करे, जब तक भाई यहाँ रहे तब तक हम मौज मस्ती कर सकें।
बस फिर क्या था भाई को रिझाने के लिए मैंने अपने कपड़े चेंज कर लिए।
दिन में इतनी ठंड तो थी नहीं, क्योंकि ठंड अभी रात को ही होती थी, दिन में मौसम नोर्मल ही था अभी, इसलिए मैंने शर्ट और स्कर्ट पहन ली पर शर्ट के नीचे ब्रा नहीं पहनी और स्कर्ट के नीचे गुलाबी रंग की पेंटी जरूर पहन ली थी।
जो स्कर्ट मैंने पहनी थी वो बहुत ही शार्ट थी जिसमें मेरी गोरी टाँगें और आधी से ज्यादा मेरी जांघें दिखाई दे रही थी, और स्कर्ट ने तो बस मेरी पेंटी ही छुपा रखी थी बाकी सब तो ओपन ही था।
ब्रा न पहनने के कारण शर्ट में मेरे बूब्स का आकर सही से नजर आ रहा था।
जब मैं तैयार होकर आईने के सामने आई तो आज मैं खुद को ही बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही थी।
आईने में देखते हुए मैंने अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन भी खोल दिए, शर्ट के दो बटन खुलते ही मेरे बूब्स दिखाई देने लगे।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
अब मैं और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी, अब मुझे पूरा यकींन हो गया था कि  भाई मेरी मस्त मस्त, गोल गोल चूचियों को देखकर मुझ पर जरूर फ़िदा हो जायेंगे।
शर्ट के नीचे ब्रा तो थी नहीं और ऊपर के दो बटन भी खुले हुए थे, तो मुझे ऐसा लग रहा था कि हवा भी मेरी चूचियों को छेड़ती हुई महसूस हो रही थी।
मैं अपने कपड़े बदल कर भाई के पास पहुँची, जिस कमरे में और मेरे भाई बहन तीनों टी वी देख रहे थे। मैं भी वहीं  भाई के सामने कुर्सी पर बैठ गई।
मुकेश और पारुल टी वी के नजदीक आगे की तरफ बैठे थे, अगर मैं कोई भी हरकत करती तो उन दोनों को पता नहीं चल पाता।
मुकेश और पारुल दोनों ही बड़े ध्यान से टी वी देख रहे थे, पर जैसे ही मैं कुर्सी पर बैठी तो  भाई का ध्यान मेरी तरफ गया और वो मुझे एकटक देखने लगे और बस देखते ही जा रहे थे।
मेरे इस बदले हुए रूप को शायद ही उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।
कभी वो मेरे चेहरे को देखते तो कभी वो मेरे बूब्स देख रहे थे जो कि दो बटन खुले होने के कारण कुछ ही ज्यादा बाहर को आ गए थे।
भाई का ध्यान अब मेरे बूब्स में ही अटका हुआ था इसलिए मैंने अपनी सोची समझी हुई दूसरी चाल भी चल दी मतलब यह कि मैंने अपने दोनों पैरो इस तरफ से खोले कि उनको यह महसूस ही न हो कि मैं ये सब जान बूझकर कर रही हूँ।जैसे ही मैंने अपने दोनों पैर खोले तो  भाई की नज़र मेरे बूब्स से होते हुए मेरी टांगों के बीच गई। वहाँ पर उनकी नजर गुलाबी पेंटी से ढकी हुई मेरी अनछुई चूत पर गई।मेरी गुलाबी पेंटी में मेरी चूत का उभरा हुआ भाग साफ़ साफ़  भाई को दिखाई दे रहा था।एक पल को तो  भाई पलके झपकाना ही भूल गए थे।कैसी लगी हम डॉनो भाई बहन की सेक्स स्टोरी , अच्छा लगी तो शेयर करना , अगर कोई मेरी चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो अब जोड़ना Facebook.com/PriyaKumari

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