Hindi Sex Story & हिंदी सेक्स कहानियाँ

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दोस्त की माँ के साथ सेक्स की अनुभव

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दोस्तों ये सेक्स कहानी आज से करीब 6 साल पहले की है। मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त था.. जिसका नाम सिद्धू था। उसके घर पर उसकी माँ 2 बहने और एक छोटा भाई था। सिद्धू अपने घर पर सबसे बड़ा था। में और सिद्धू एक साथ ही एक कॉलेज में पढ़ाई करते थे और साथ ही हमने कंप्यूटर क्लास भी शुरू कर रखी थी। अक्सर मेरा उसके घर पर आना जाना था.. लेकिन में कभी भी बुरी नज़र से उसकी माँ और बहन को नहीं देखता था। सिद्धू के पापा एक सरकारी नौकरी करते थे और उसके भाई बहन स्कूल जाते थे।

फिर कॉलेज के बाद सिद्धू सरकारी नौकरी की तैयारी में लग गया.. लेकिन मुझे सरकारी नौकरी में कोई रूचि नहीं थी। सरकारी नौकरी पाने के चक्कर में सिद्धू सुबह से लेकर रात तक पड़ाई करता था और जिसका नतीज़ा ये हुआ कि उसको एक बहुत अच्छी सरकारी नौकरी मिल भी गई और उसकी पोस्टिंग दिल्ली से बाहर हो गई.. लेकिन मेरा सिद्धू के घर आन जाना था तो फिर में महीने में एक या दो बार उसके घर पर चल जाता था। सिद्धू की मम्मी को जब भी कोई बाजार से कोई सामान लाना होता था तो वो मुझे फोन करती थी.. कि रवि ये सामान ला दो या वो सामान ला दो.. क्योंकि मार्केट उनके घर से बहुत दूर था.. इसलिए वो मुझे बोलती थी सामान लाने के लिए।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर ऐसे करते करते दो साल गुजर गए और फिर एक दिन सिद्धू की मम्मी का फोन आया और वो बोली कि मुझे एक सामान मंगवाना है.. तो में बोला कि बताओ आंटी क्या लाना है लेकिन सिद्धू की माँ थोड़ा खुलकर नहीं बोल रही थी। तभी मैंने बोला कि आंटी बोलो ना क्या लाना है? तो आंटी थोड़ा हिचकिचा रही थी। तभी मेरे ज्यादा दबाव देने पर आंटी बोली कि.. क्या तुम मुझे एक ब्रा ला दोगे? क्योंकि मेरी सभी पुरानी ब्रा फट गयी है और मुझे मार्केट जाने का टाईम नहीं मिल रहा है। तभी ये सुनते ही में एक मिनट के लिए हिल गया.. लेकिन फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके बोला कि आंटी किस साईज़ की ब्रा लानी है? तो आंटी बोली कि 42 नम्बर की। तभी मैंने हाँ कर दी और कहा कि हाँ में ला दूंगा। फिर आंटी बोली कि लेकिन रवि तुम क़िसी को बताना नहीं कि मैंने तुम से ये चीज़ मँगवाई है। फिर में समझ गया था और हिम्मत करके बोल दिया कि आंटी एक शर्त पर लाऊंगा.. आप अगर मुझे पहन कर दिखाओगे.. तो आंटी बोली कि पहले ला तो दो। फिर मैंने उस दिन शाम को ब्रा खरीदी और रात भर सोचता रहा कि क्या में सच में कल आंटी को ब्रा में देख पाउँगा। खेर फिर जैसे तैसे रात गुज़री और अगले दिन में 9 बजे तैयार हो गया क्योंकि आंटी का फोन जो आना था। तभी उसके आधे घंटे बाद 9.30 बजे आंटी का फोन आया और वो बोली कि कब आओगे? फिर में बोला कि आंटी में तो तैयार हूँ आप बोलो कब आना है और अंकल ऑफीस गए क्या? तभी बोली हाँ वो तो सुबह ही गये और सिद्धू की बहने भी गई.. वो 1 बजे आएगी स्कूल से। तभी में बोला कि ठीक है में अभी आ रहा हूँ और मैंने जल्दी से बाईक निकाली और 10 बजे आंटी के घर पहुंच गया।

फिर जैसे ही में घर के अंदर घुसा आंटी नाईट गाउन में और आंटी के फिगर एकदम साफ साफ नज़र आ रहे थे.. मोटे मोटे बूब्स और उनकी उभरी हुई गांड भी मुझे दिख रही थी और उस दिन मैंने पहली बार आंटी को इस नज़र से गौर से देखा था। खेर फिर आंटी किचन में गई और पानी ले आई तो मैंने पानी पिया और कहा कि आंटी आपका समान आंटी ने पकड़ा और चली गई। तभी आंटी थोड़ी देर बाद आकर मेरे सामने बैठ गई। फिर में बोला कि आंटी पहन कर चेक तो कर लो.. तो वो बोली कि कोई बात नहीं में बाद में चेक कर लूँगी। तभी मैंने बोला कि लेकिन आंटी अपने तो बोला था कि पहन कर दिखाउंगी.. तो आंटी बोली कि नहीं मैंने तो ऐसा नहीं बोला था। फिर में चुप होकर बैठ गया और आंटी को लगा शायद में उनसे नाराज़ हो गया हूँ। तो आंटी बोली कि क्या हुआ? लेकिन में कुछ भी नहीं बोला और मेरा मूड खराब हो गया तो फिर वो बोली कि क्यों क्या हुआ? तभी मैंने बोला कि मैंने कितने ख्वाब देखे थे कि आप ब्रा पहन कर दिखाओगी।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। तभी आंटी बोली कि चल में अभी आती हूँ.. तू टीवी देख। फिर 5 मिनट बाद आंटी आई और मेरे सामने नाईट गाउन में आ गई और बोली कि ले देख ले.. इतने में आंटी ने अपना गाउन ऊपर कर दिया और जल्दी से नीचे भी गिरा दिया। फिर में 1 मिनट के लिए देखता रह गया.. आंटी क्या सेक्सी लग रही थी। फिर में बोला कि आंटी आपने तो जल्दी से गिरा दिया.. कम से कम अच्छे से देखने तो दो। तो आंटी मना करने लगी तभी में हिम्मत करके उठा और आंटी के पास चल गया और बोला कि देखूं तो। फिर आंटी बोली कि दिखा तो दिया और अब कितना दिखाऊँ। फिर में बोला कि आंटी मुझे पास से देखना है तो आंटी मना करने लगी.. लेकिन में हिम्मत करके आंटी के गाउन को ऊपर की तरफ उठाने लगा। तभी आंटी बोली कि रवि मत करो प्लीज़.. लेकिन में नहीं माना और मैंने आंटी को बेड पर लेटा दिया और आंटी का गाउन पूरा ऊपर कर दिया.. लेकिन आंटी फिर भी मना करती रही और में आंटी का गाउन ऊपर करता रहा और धीरे धीरे मैंने आंटी का पूरा गाउन ऊपर कर दिया अब आंटी मेरे सामने सफेद कलर की ब्रा में थी.. जो में खरीद कर लाया था और भूरे कलर की पेंटी में थी और आंटी ने अपनी आँखें बंद कर ली और अपना गाउन नीचे करने के कोशिश करती रही। तभी मैंने हिम्मत करके आंटी के बूब्स पर हाथ रख दिया और आंटी के दूसरे बूब्स पर किस करने लगा.. आंटी मना करने लगी लेकिन में बोला कि आंटी आज मना मत करो। फिर धीरे धीरे आंटी ने अपने आपको ढीला छोड़ दिया और मैंने एक हाथ आंटी की चूत पर रख दिया और पेंटी के ऊपर से ही चूत को सहलाने लगा। फिर आंटी कुछ नहीं बोल रही थी शायद वो गरम हो रही थी और में भी कामुक हो गया था और मेरा लंड तनकर खड़ा था। फिर मैंने जल्दी से अपनी शर्ट, पेंट और बनियान उतारकर अंडरवियर में आंटी के ऊपर लेट गया और आंटी के बूब्स सक करने लगा और आंटी की चूत पर अपने लंड की सेटिंग बैठाकर हल्के हल्के लंड को चूत पर रगड़ने लगा।

मैंने दोस्त की माँ गाउन को पूरा निकाल दिया और आंटी की ब्रा खोल दी और गोरे गोरे बूब्स देख कर में पागल सा हो गया और ज़ोर ज़ोर से सक करने लगा। आंटी बोली कि रवि आराम से करो प्लीज.. फिर में आंटी के होंठो पर किस करने लगा। 10 मिनट किस करने के बाद में वापस बूब्स सक करने लगा और सकिंग करते करते में आंटी के पेट की नाभि पर जीभ फैरने लगा तो आंटी मचलने लगी। फिर धीरे धीरे में नीचे की तरफ बड़ा और आंटी की चूत को पेंटी के ऊपर से चाटने लगा। फिर मैंने आंटी को उल्टा लेटा दिया और आंटी की बड़ी गांड को देखकर में रुक ना सका और आंटी की कमर पर किस करता करता उनके कूल्हों पर पहुंच गया और कूल्हों पर मैंने हल्का सा काट दिया। फिर मैंने अपनी अंडरवियर उतार दी और पेंटी के अंदर से कूल्हों पर रगड़ने लगा। फिर मैंने आंटी को सीधा किया और उनकी पेंटी को खोल दिया.. उनकी चूत एकदम साफ थी।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर में उनकी चूत को चाटने लगा और साथ साथ अपनी एक ऊँगली चूत में डालकर अंदर बाहर करने लगा.. आंटी तो एकदम मदहोश हो चुकी थी और शायद पहली बार क़िसी ने उनकी चूत चाटी होगी। फिर में उनकी छाती पर बैठकर अपने लंड से उनके बूब्स को रगड़ने लगा तो मेरा लंड आंटी के कूल्हों को छू रहा था। तो आंटी अपना मुहं इधर उधर कर रही थी। फिर मैंने आंटी को बोला कि आंटी चूसो प्लीज.. तो आंटी ने मना कर दिया.. लेकिन में बोला कि सिर्फ़ एक मिनट प्लीज। तभी वो मान गई और उन्होंने अपना मुहं खोला तो मैंने जल्दी से अपना लंड उनके मुहं के अंदर डाल दिया। तभी थोड़ी देर चुसवाने के बाद में उठकर उनकी चूत के पास आ गया और दोबारा चूसने लगा तो आंटी बोली कि रवि अब डालो और मत तड़पाओ प्लीज।

तभी मैंने आंटी के दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए और अपना लंड आंटी के चूत के छेद पर रखा और ज़ोर से झटका दिया तो आंटी थोड़ा सा हिली फिर एक झटका दिया और लंड पूरा एक बार में अंदर चल गया और फिर में आंटी को चोदने लगा। फिर में आंटी के ऊपर पूरा लेट कर चोदने लगा.. मेरा और आंटी का एक एक अंग आपस में मिल रह था जिससे मुझे बड़ा आनंद आ रहा था। 15 मिनट बाद जब में झड़ने लगा तो आंटी से पूछा कि कहाँ पर गिराऊ? तभी आंटी बोली कि बाहर करना.. तो फिर जैसे ही मेरा वीर्य निकलने ही वाला था तो मैंने जल्दी से अपना सारा वीर्य आंटी के पेट और चूत के ऊपर छोड़ दिया और वापस लेट गया और फिर थोड़ी देर बाद में ऊपर से उठा और मैंने अपना लंडा साफ किया तो आंटी मुझसे बोली कि ये बात क़िसी को पता नहीं लगनी चाहिए और अब क्या मुझे भूल तो नहीं जाओगे? तभी मैंने आंटी को बोला कि नहीं आंटी अब तो में रोज़ आया करूँगा और आपसे बिना पूछे आपकी चुदाई करूंगा। फिर आंटी उठी और बोली कि मेरी ब्रा और पेंटी पकड़ा दो। तो मैंने बोला कि रुको में आपको पहना भी देता हूँ। फिर मैंने आंटी को ब्रा और पेंटी पहनाई।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर आंटी ने गाउन पहना और किचन में चली गई चाय बनाने के लिए और में टीवी देखता रहा। तभी थोड़ी देर बाद में फिर से तैयार हो गया तो में भी किचन में चल गया और फिर आंटी का गाउन ऊपर करके अपना लंड आंटी की गांड में रगड़ता रहा। तभी आंटी बोली कि अब नहीं रवि में थक गई हूँ.. लेकिन मैंने उनकी एक भी नहीं सुनी और गाउन ऊपर करके आंटी की पेंटी नीचे करके में किचन में ही मैंने आंटी को थोड़ा झुका दिया और एक बार फिर से चुदाई करने लगा और दूसरा राउंड होने की वजह से इस बार में 30 मिनट तक आंटी को चोदता रहा.. लेकिन इस बीच आंटी 2 बार झड़ गई थी और इस बार मैंने बिना बोले अपना वीर्य आंटी की चूत में छोड़ दिया और आंटी अपने आपको को छुड़ाने लगी.. लेकिन मैंने उनको और कसकर पकड़ लिया और अपना सारा वीर्य आंटी की चूत में डाल दिया। फिर जब मैंने अपनी पकड़ ढीली की तो आंटी बोली कि तुमने वीर्य अंदर क्यों डाल दिया? और अगर में गर्भवती हो गई तो। तभी मैंने कहा कि आंटी आप खुद ही समझदार हो और गर्भवती कैसे होते है? आपको ये बात अच्छी तरह से पता है।आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर आंटी बोली कि तुम तो बड़े बदमाश निकले.. फिर हमने चाय पी और में वापस आने लगा तो आंटी बोली कि आते रहना। फिर में बोला कि.. जी आंटी अब तो रोज़ आना पड़ेगा। आप बस फोन कर दिया करो कि घर पर कोई भी नहीं है। दोस्तों उस दिन से लेकर आज तक में आंटी को चोद रहा हूँ ।कैसी लगी दोस्त की माँ की चुदाई की स्टोरी , शेयर करना , अगर कोई मेरी दोस्त की माँ की चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे अब जोड़ना Facebook.com/AartiSharma

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